गोपीनाथ ने यह भी चेतावनी दी कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है और तेल आपूर्ति बाधित होती है तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
नई दिल्ली ( भारत)। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा अनुमानित भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत है, लेकिन तेल की ऊंची कीमतों से अर्थव्यवस्था पर लगातार पड़ रहे दबाव के कारण यह दर घटकर 6 प्रतिशत के करीब आ सकती है। यह जानकारी आईएमएफ की पूर्व उप प्रबंध निदेशक और मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने एएनआई को दी। गोपीनाथ के अनुसार, तेल की ऊंची कीमतों का असर अगले साल तक बना रहने की संभावना है। उन्होंने कहा कि "तेल की कीमतों में इतनी जल्दी गिरावट नहीं आने वाली है। तेल की कीमत को 70 या 75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने में शायद अगले साल के मध्य तक का समय लगेगा।
ऊर्जा की बढ़ती लागत से निवेश प्रभावित होंगे
उन्होंने कहा कि ऊर्जा की बढ़ती लागत से उपभोग और निवेश प्रभावित होंगे, जिससे आईएमएफ के मौजूदा अनुमान की तुलना में आर्थिक वृद्धि दर धीमी रहेगी। गोपीनाथ ने यह भी चेतावनी दी कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है और तेल आपूर्ति बाधित होती है तो स्थिति और बिगड़ सकती है। उन्होंने कहा कि बाजार लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की संभावना को कम आंक रहे हैं। गोपीनाथ ने कहा, “अगर यह स्थिति एक महीने और जारी रहती है, तो तेल की कीमतें 120 से 140 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं और लंबे समय तक इसी स्तर पर बनी रह सकती हैं। ऐसे में वैश्विक विकास दर, जो वर्तमान में 3.1 प्रतिशत अनुमानित है, घटकर 2.5 प्रतिशत और यहां तक कि 2 प्रतिशत के करीब भी आ सकती है।”
उन्होंने कहा कि इस तरह की स्थिति से भारत की विकास संभावनाओं पर अधिक दबाव पड़ेगा।
परमाणु और सौर उर्जा के अधिक उपयोग की जरूरत
उन्होंने नवीनीकरण उपायों में परमाणु और सौर उर्जा के अधिक उपयोग से आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम होगी। इससे व्यापार को बेहतर बनाने में निवेश आकर्षित करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा, “कृत्रिम कृत्रिम ऊर्जा (एआई) के बारे में सकारात्मक दृष्टिकोण रखना सकारात्मक साबित हो सकता है, भारत में निवेश पूंजी के लिए रुचि बढ़ाने में सहायक होगा और रुपये पर दबाव भी कम करेगा।” गोपीनाथ ने आगे कहा कि वैश्विक व्यापार के बदलते स्वरूप से भारत के लिए अवसर पैदा हो सकते हैं, खासकर जब देश व्यापारिक संबंध बढ़ा रहा है और यूरोपीय संघ सहित कई देशों के साथ समझौते कर रहा है। उन्होंने कहा कि इससे भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी भूमिका मजबूत करने में मदद मिल सकती है। (एएनआई)