अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में संभावित बाधाओं के बीच भारत की ऊर्जा और कृषि आपूर्ति पर दबाव बढ़ता दिख रहा है।
नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में संभावित बाधाओं के बीच भारत की ऊर्जा और कृषि आपूर्ति पर दबाव बढ़ता दिख रहा है। इसी बीच देश में उर्वरकों की आपूर्ति को लेकर वैश्विक स्रोतों पर निर्भरता और भी स्पष्ट हो गई है। पिछले वित्त वर्ष में चीन से उर्वरक आयात में 173.32% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
चीन से रिकॉर्ड बढ़ोतरी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में चीन से भारत का उर्वरक आयात बढ़कर लगभग 5.02 मिलियन टन तक पहुंच गया। यह पिछले वर्ष की तुलना में 173.32% की वृद्धि दर्शाता है। इसी अवधि में चीन से कुल आयात 50 मिलियन टन से अधिक बताया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि चीन भारत के लिए उर्वरक आपूर्ति में एक अहम साझेदार बनता जा रहा है।
रूस सबसे बड़ा सप्लायर
रिपोर्ट के मुताबिक, रूस अब भी भारत का सबसे बड़ा उर्वरक आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।
- वित्त वर्ष 2026 में रूस से आयात: 6.8 मिलियन टन
- पिछले वर्ष: 4.9 मिलियन टन
- वाणिज्य विभाग के अनुसार यह आंकड़ा 6.71 मिलियन टन रहा, जिसमें लगभग 35.08% की वृद्धि दर्ज की गई।
अन्य देशों से भी बढ़ी आपूर्ति
भारत अपनी कृषि जरूरतों को पूरा करने के लिए कई देशों पर निर्भर है।
- सऊदी अरब से आयात में 22.70% की वृद्धि
- मोरक्को से आयात 98.73% बढ़कर 2.79 मिलियन टन
- ओमान से आयात में 35.32% की गिरावट, अब 1.91 मिलियन टन
वैश्विक भू-राजनीति का असर
भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अस्थिरता के बीच भारत रूस, चीन, ओमान, सऊदी अरब और कनाडा जैसे देशों से दीर्घकालिक समझौतों के जरिए अपनी उर्वरक और ऊर्जा जरूरतें पूरी करने की कोशिश कर रहा है। देश में बढ़ती कृषि मांग और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते आने वाले समय में उर्वरक आपूर्ति व्यवस्था और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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