पिछले 12 सालों में भारत की विदेश नीति बिल्कुल साफ रही है। भारत अब सबसे पहले अपने हितों को ध्यान में रखकर फैसला करता है।
नई दिल्ली। पिछले 12 सालों में भारत की विदेश नीति बिल्कुल साफ रही है। भारत अब सबसे पहले अपने हितों को ध्यान में रखकर फैसला करता है। नेबरहुड फर्स्ट नीति के तहत भारत ने सबसे पहले पड़ोसी देशों को साधने की कोशिश की ताकि देश के अगल-बगल एक अच्छा माहौल रह सके। इस नीति का परिणाम काफी अच्छा देखने को मिला है। पिछले कुछ वर्षों को छोड़ दें तो बांग्लादेश के साथ भारत के रिश्ते व्यापारिक रुप से बेहद मजबूत हुए हैं। नेपाल के साथ भी रिश्ता मजबूत रहा है।
खाड़ी देशों के साथ रिश्तों में आया नया दौर
खाड़ी देशों को लेकर भारत ने अपनी नीति में काफी बदलाव किया और मुस्लिम देशों के साथ रिश्तों को बेहद मजबूत किया। इसी दौरान यूएई और सऊदी अरब के साथ ऐतिहासिक रुप से रिश्तों की शुरुआत हुई। भारत ने मजबूत विदेश नीति के बदौलत ही अबूधाबी में 2024 को पीएम मोदी बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर का उद्घाटन किया। इसके साथ ही 2019 में पीएम मोदी ने बहरीन सरकार के साथ मिलकर भगवान श्रीकृष्ण मंदिर का जीर्णोद्धार कराया।
पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने में सफलता
एक तरफ जहां भारत ने मजबूत विदेश नीति का लोहा मनवाते हुए आतंकवाद के लिए दुनियाभर में मशहूर पाकिस्तान को दुनिया से अलग-थलग कराया। वहीं, मिडिल ईस्ट में भारत ने मल्टी एलाइन्मेंट पर काफी ध्यान दिया। भारत की विदेश नीति गुटनिरपेक्ष नहीं बल्कि इंट्रेस्ट ड्रिवेन की तरफ बढ़ी, यानि भारत अपने हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले ले रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरों से बढ़ी भारत की वैश्विक पहुंच
प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरों ने भी भारत को दुनिया से कनेक्ट रखने में बड़ा योगदान दिया है। भारत की छवि और व्यापार और बाजार, ये सब दुनिया के सामने शोकेस हुए। भारत दुनिया के लिए बड़ा बाजार बनकर उभरा और संभावनाओं वाला डेस्टीनेशन बनकर सामने आया।
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