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भारत-नेपाल सीमा विवाद

सीमा विवाद पर बोले नेपाली पीएम बालेन्द्र शाह- 'बातचीत और कूटनीति से सुलझेंगे सीमा विवाद'

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने रविवार को कहा कि भारत के साथ सीमा विवाद बातचीत और कूटनीति के ज़रिए सुलझाया जाएगा।

सीमा विवाद पर बोले नेपाली पीएम बालेन्द्र शाह- बातचीत और कूटनीति से सुलझेंगे सीमा विवाद

Nepal PM backs talks, diplomacy to solve border issue with India |

काठमांडू (नेपाल)। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने रविवार को कहा कि भारत के साथ सीमा विवाद बातचीत और कूटनीति के ज़रिए सुलझाया जाएगा। प्रधानमंत्री, ने बातचीत के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत के साथ सीमा विवाद "टेबल पर बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के ज़रिए" सुलझाया जाएगा।

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर विवाद

भारत ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि वह द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े सभी मुद्दों पर नेपाल के साथ रचनात्मक बातचीत के लिए तैयार है। इसमें बातचीत और कूटनीति के जरिए सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाना भी शामिल है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में कैलाश मानसरोवर यात्रा के संदर्भ में सीमा विवाद को लेकर कुछ दावे किए हैं। इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणदीप जायसवाल ने मीडिया के सवालों का जवाब दिया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस पूरे मामले पर भारत का रुख हमेशा से बेहद स्पष्ट और अडिग रहा है।

भारत ने नेपाल के दावों को किया खारिज

प्रवक्ता ने कहा, "लिपुलेख दर्रा 1954 से ही कैलाश मानसरोवर यात्रा का एक पुराना रास्ता रहा है और इस रास्ते से यात्रा दशकों से चली आ रही है। यह कोई नई बात नहीं है।" उन्होंने आगे कहा, "जहां तक ​​क्षेत्रीय दावों की बात है, भारत का हमेशा से यही मानना ​​रहा है कि ऐसे दावे न तो सही हैं और न ही ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित हैं। क्षेत्रीय दावों का इस तरह से एकतरफा और मनमाने तरीके से विस्तार करना स्वीकार्य नहीं है।"

साल 2020 में भारत ने खारिज किया था नेपाल का नया नक्शा

भारत ने 2020 में केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार के लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी से जुड़े कदम को खारिज कर दिया था और कहा था कि जारी किए गए नए नक्शे में भारतीय क्षेत्र के कुछ हिस्से शामिल हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा था, "यह एकतरफा कदम ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित नहीं है। यह कूटनीतिक बातचीत के ज़रिए सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाने की द्विपक्षीय सहमति के खिलाफ है। क्षेत्रीय दावों का इस तरह से मनमाने तरीके से विस्तार भारत को स्वीकार्य नहीं होगा।" (ANI)

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