Reserve Bank of India (RBI) गत वर्षों की तरह इस वर्ष भी केंद्र सरकार को भारी-भरकम लाभांश (सरप्लस मुनाफा) देने जा रहा है।
मुंबई। Reserve Bank of India (RBI) गत वर्षों की तरह इस वर्ष भी केंद्र सरकार को भारी-भरकम लाभांश (सरप्लस मुनाफा) देने जा रहा है। रिजर्व बैंक की शुक्रवार को होने वाली अहम बैठक में इस संबंध में अंतिम फैसला लिया जाएगा।
केंद्रीय बोर्ड की अहम बैठक आज
आरबीआई बोर्ड की महत्वपूर्ण बैठक शुक्रवार को बुलाई गई है। इस बैठक में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार को सरप्लस ट्रांसफर करने पर निर्णय होगा। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि यह राशि ₹2.7 लाख करोड़ से ₹3.4 लाख करोड़ के बीच हो सकती है।
रिकॉर्ड स्तर पर हो सकता है ट्रांसफर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 22 मई को होने वाली केंद्रीय बोर्ड बैठक में आरबीआई इस बार रिकॉर्ड स्तर पर सरप्लस ट्रांसफर का फैसला ले सकता है। आरबीआई को यह अधिशेष विदेशी मुद्रा भंडार पर लाभ, बॉन्ड होल्डिंग्स और ब्याज आय से प्राप्त होता है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि सरकार को मिलने वाला यह डिविडेंड ₹2.7 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ के बीच रह सकता है।
सरकार को मिलेगा राजकोषीय राहत
केंद्र सरकार ने अपने बजट में सरकारी कंपनियों और आरबीआई से मिलने वाले कुल डिविडेंड का लक्ष्य ₹3.16 लाख करोड़ रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस भारी धनराशि से सरकार को राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखने और वैश्विक अनिश्चितताओं, जैसे पश्चिम एशिया तनाव और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव, से निपटने में मदद मिलेगी।
पिछले वर्ष मिला था ₹2.68 लाख करोड़
अगर पिछले साल की बात करें तो आरबीआई ने केंद्र सरकार को ₹2.68 लाख करोड़ का सरप्लस ट्रांसफर किया था, जो उससे पिछले वर्ष की तुलना में 27% अधिक था। शुक्रवार को मुंबई में होने वाली बोर्ड बैठक में इस वर्ष की राशि पर अंतिम मुहर लगेगी। हालांकि इस मामले में फिलहाल आरबीआई की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
जालान समिति की सिफारिशों पर तय होता है लाभांश
यह लाभांश आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल द्वारा पूर्व गवर्नर Vimal Jalan की समिति की सिफारिशों के तहत संशोधित ‘आर्थिक पूंजी ढांचा’ (ECF) नियमों के आधार पर तय किया जाता है।
RBI अधिनियम के तहत अनिवार्य प्रक्रिया
इस प्रकार का सरप्लस हस्तांतरण Reserve Bank of India Act, 1934 की धारा 47 के तहत अनिवार्य माना जाता है।
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