नासा के प्रशासक जेरेड इसाकमैन ने एक बयान में कहा, यह मून बेस किसी अन्य खगोलीय पिंड पर अमेरिका और पूरी मानवता की पहली चौकी होगी।
नासा । अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी (NASA) ने चंद्रमा पर एक स्थायी बेस बनाने की अपनी अब तक की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक का खुलासा किया है। इस योजना के तहत इंसानों को भेजने से पहले रोबोटिक लैंडर्स, मून बग्गी (चंद्रमा पर चलने वाले वाहन) और हॉपिंग ड्रोन (उछलने वाले ड्रोन) तैनात किए जाएंगे।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में सैकड़ों वर्ग मील में फैले एक स्थायी चंद्र बेस की परिकल्पना की है। नासा ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा, "यह पहल अंतरिक्ष में अमेरिकी नेतृत्व को सुरक्षित करेगी, अभूतपूर्व वैज्ञानिक खोजों के रास्ते खोलेगी, और इंसानों को मंगल ग्रह पर भेजने के लिए आवश्यक तकनीकों और परिचालन अनुभव को तैयार करेगी।"
मिशन के लिए बुनियादी ढांचा तैयार कर रहेः जेरेड इसाकमैन
नासा के प्रशासक जेरेड इसाकमैन ने एक बयान में कहा, "यह मून बेस किसी अन्य खगोलीय पिंड पर अमेरिका और पूरी मानवता की पहली चौकी (outpost) होगी। हर मिशन, चाहे वह मानव रहित हो या मानव युक्त, हमारे लिए सीखने का एक अवसर होगा क्योंकि हम चंद्र सतह पर लौट रहे हैं, वहां बने रहने के लिए बुनियादी ढांचा तैयार कर रहे हैं, और सबसे कठिन और खतरनाक वातावरण में काम करने का कौशल हासिल कर रहे हैं।"
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चंद्रमा के सबसे पुराने क्षेत्रों में से एक 'साउथ पोल-एटकेन बेसिन' (South Pole-Aitken Basin) के करीब स्थित है। यह सौर मंडल का सबसे बड़ा और सबसे पुराना ज्ञात प्रभाव बेसिन (impact basin) है। इस क्षेत्र से एकत्र किए गए नमूने चंद्रमा, पृथ्वी-चंद्रमा प्रणाली के शुरुआती इतिहास और सौर मंडल के व्यापक विकास को समझने में मदद कर सकते हैं।
नासा के इस वर्ष के मुख्य मिशन और साझेदारियां
मून बेस I, II और III: इस साल के अंत में 'मून बेस I, II और III' नाम के तीन मानव रहित चंद्र मिशन लॉन्च किए जाने की योजना है।
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मून बेस I: इसे इस साल के अंत में जेफ बेजोस की कंपनी 'ब्लू ओरिजिन' के 'ब्लू मून मार्क 1' कार्गो लैंडर (जिसे 'एन्ड्यूरेंस' नाम दिया गया है) की मदद से लॉन्च किया जाएगा।
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मून बेस II: इसे एस्ट्रोबोटिक के 'ग्रिफिन' लैंडर के जरिए लॉन्च करने की योजना है।
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मून बेस III: इसे भी इसी साल के लिए लक्षित किया गया है।
व्यावसायिक साझेदारियाँ: नासा ने इस मिशन के लिए कई निजी कंपनियों को अनुबंध (contracts) सौंपे हैं:
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एस्ट्रोलैब और लूनर आउटपोस्ट: इन्हें लूनर टेरेन व्हीकल (LTV) के पहले चरण को विकसित करने के लिए चुना गया है। एस्ट्रोलैब को $219 मिलियन और लूनर आउटपोस्ट को $220 मिलियन का अनुबंध मिला है।
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ब्लू ओरिजिन: जेफ बेजोस की इस कंपनी को इन वाहनों को चंद्रमा की सतह तक पहुंचाने का जिम्मा सौंपा गया है।
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फायरफ्लाई एयरोस्पेस: इसे नासा के 'मूनफॉल ड्रोन' (MoonFall drones) को चंद्रमा तक ले जाने वाले अंतरिक्ष यान के निर्माण के लिए चुना गया है।
वैश्विक अंतरिक्ष रेस और भविष्य के लक्ष्य
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नासा का आर्टेमिस मिशन: इस साल अप्रैल में, नासा ने अपने ऐतिहासिक आर्टेमिस II मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया, जिसमें चार अंतरिक्ष यात्रियों (रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के जेरेमी हैनसेन) को चंद्रमा के चारों ओर 10 दिनों के चक्कर लगाने वाले मिशन पर भेजा गया था। नासा अब 2027 में आर्टेमिस III मिशन लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है।
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भारत का रोडमैप: भारत 2027 में अपने पहले मानव युक्त अंतरिक्ष मिशन गगनयान को लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा, भारत का लक्ष्य 2028 तक चंद्रयान कार्यक्रम के तहत मानव युक्त चंद्र मिशन भेजना, 2035 तक अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन बनाना और 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा की सतह पर उतारना है। भारत ने अमेरिकी नेतृत्व वाले आर्टेमिस समझौते पर भी हस्ताक्षर किए हैं।
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चीन की योजनाएं: चीन भी 2030 तक चंद्रमा पर इंसानों को उतारने की योजना पर काम कर रहा है। इसी सप्ताह, चीन ने अपने शेनझोउ-23 (Shenzhou-23) अंतरिक्ष यान को सफलतापूर्वक लॉन्च कर अंतरिक्ष यात्रियों के एक दल को अपने तियांगोंग (Tiangong) अंतरिक्ष स्टेशन भेजा है। (एएनआई)
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