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मप्र में सख्त एक्शन का दौर, दो साल में 8 कलेक्टर और 7 एसपी पर गिरी गाज

​भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इन दिनों अपने 'एक्शन मोड' के कारण चर्चा में हैं। शासन की...

मप्र में सख्त एक्शन का दौर दो साल में 8 कलेक्टर और 7 एसपी पर गिरी गाज

मप्र में सख्त एक्शन का दौर, दो साल में 8 कलेक्टर और 7 एसपी पर गिरी गाज |

​भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इन दिनों अपने 'एक्शन मोड' के कारण चर्चा में हैं। शासन की बागडोर संभालने के बाद से ही उन्होंने लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। पिछले सवा दो साल के कार्यकाल में अब तक 8 कलेक्टर और 7 एसपी पर गाज गिर चुकी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जनता के कार्यों में कोताही बरतने वाले अफसरों के लिए सरकार में कोई जगह नहीं है।

सीधी व गुना के शीर्ष अधिकारियों पर कार्रवाई

​हालिया घटनाक्रम में मुख्यमंत्री ने सीधी और गुना के शीर्ष अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री ने सीधी जिले के औचक दौरे के दौरान जनता से सीधा संवाद किया। प्रशासनिक ढिलाई और शिकायतों के अंबार को देखते हुए कलेक्टर स्वरोचित सोमवंशी को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए। इसी तरह गुना जिले में एक करोड़ रुपये की हवाला राशि के मामले में पुलिस की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर एसपी अंकित सोनी को पद से हटा दिया गया है। सीधी में ही जिला सहकारी बैंक के महाप्रबंधक पी.एस. धनवाल को भी लापरवाही के चलते निलंबित कर दिया गया है।

​मुख्यमंत्री का कड़ा संदेश

​मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया और बैठकों के माध्यम से बार-बार यह संदेश दिया है कि  भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था में चूक और प्रशासनिक शिथिलता को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, जो अधिकारी मैदान में रहकर जनता की समस्याओं का समाधान नहीं कर सकते, उन्हें मैदानी पोस्टिंग के बजाय मंत्रालय (वल्लभ भवन) में अटैच किया जाएगा। सीएम खुद जिलों का औचक दौरा कर रहे हैं ताकि जमीनी हकीकत का पता लगाया जा सके।

​इस मुद्दे पर की गई कार्रवाई

मुख्यमंत्री की कार्रवाई मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर केंद्रित रही है। सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी को अहम माना गया। प्रदेश में अपराध नियंत्रण में विफलता या पुलिस की संदिग्ध भूमिका को आधार माना गया और वित्तीय अनियमितताओं और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की गई। सीएम मोहन यादव ने अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई का एक स्पष्ट पैटर्न दिखाया है। लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामलों में सबसे ज्यादा कड़े कदम उठाए गए हैं।

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