सदर अस्पताल औरंगाबाद में दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए दिव्यांगों को चक्कर काटना पड़ रहा है। इस भीषण गर्मी में दिव्यांगों के साथ उनके स्वजनों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
औरंगाबाद (बिहार)। सदर अस्पताल औरंगाबाद में दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए दिव्यांगों को चक्कर काटना पड़ रहा है। इस भीषण गर्मी में दिव्यांगों के साथ उनके स्वजनों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है, क्योंकि वह अकेले नहीं आ सकते।
भीषण गर्मी में अस्पताल पहुंचे दिव्यांग, नहीं मिले डॉक्टर
एक ओर जहां स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी से बचने के लिए महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की गई। वहीं दिव्यांग जान जोख़िम में डालकर मंगलवार को सिविल सर्जन कार्यालय पहुंच गए। हालांकि अस्पताल पहुंचे मरीजों को जिम्मेदार चिकित्सक नदारद मिले। करीब 30 किमी की दूरी तय कर 80 से अधिक दिव्यांग किसी तरह अस्पताल पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि सुबह 8 बजे से दोपहर एक बजे तक बैठे हैं। इसके बावजूद चिकित्सक का पता नहीं है। उन्हें एक सप्ताह बाद दोबारा आना पड़ेगा।
हर सप्ताह लौट रहे निराश, कार्रवाई की मांग
दिव्यांगजनों का कहना है कि डॉक्टर साहब, हर सप्ताह चक्कर काट रहे हैं, अब तो प्रमाण पत्र बना दो। बता दें कि सदर अस्पताल में मंगलवार को ही सर्टिफिकेट बनाए जाते हैं। हालांकि, इस दौरान कई दिव्यांग मायूस होकर लौट गए। सबसे ज्यादा परेशानी डंडो के सहारे और घिसट कर चलने वाले दिव्यांगों को झेलनी पड़ी। आज अपना दिव्यंगता प्रमाण-पत्र अपडेट करवाने आए फेसर थाना क्षेत्र के उन्थू गांव निवासी अशोक यादव, भलुआही गांव निवासी शिवपूजन एवं ओबरा निवासी रितेश कुमार सहित दर्जनों लोगों ने बताया कि वे सुबह करीब 9 बजे अस्पताल में आए थे। दोपहर एक बजे तक कोई चिकित्सक नहीं आए हैं। वे सभी पिछले मंगलवार को भी आए थे।
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