नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी अशांति और कच्चे तेल की कीमतों में आये उछाल के कारण देश में...
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी अशांति और कच्चे तेल की कीमतों में आये उछाल के कारण देश में मंहगाई बढ़ने का खतरा मंडराने लगा है। इस बीच वैश्विक निवेश बैंक ''गोल्डमैन सैक्स'' ने वर्ष 2026 के लिए भारत के जीडीपी अनुमान को घटाकर 5.9% कर दिया है। इन परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को खुदरा महंगाई दर को मार्च 2031 तक 4 फीसदी पर बनाए रखने का निर्देश दिया है।
केंद्र सरकार ने आरबीआई को निर्देश दिया है कि वह खुदरा महंगाई दर को मार्च 2031 तक 4 फीसदी पर बनाए रखे। इसमें 2 फीसदी ऊपर या नीचे की सीमा तय की गई है, यानी महंगाई 2 से 6 फीसदी के बीच रह सकती है। इससे पहले सरकार ने 2016 में पहली बार भारतीय रिजर्व बैंक को यही लक्ष्य दिया था। बाद में इसे 2026 तक बढ़ाया गया था। दूसरी बार इसे आगे बढ़ाकर 2031 तक कर दिया गया है। इस निर्देश के बाद जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बदलाव कर सकता है। इससे आम लोगों की जेब और खर्च पर सीधा असर पड़ेगा।
इस बीच पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल को देखते हुए वैश्विक निवेश बैंक ''गोल्डमैन सैक्स'' ने वर्ष 2026 के लिए भारत के जीडीपी अनुमान को घटाकर 5.9% कर दिया है। इसके साथ ही, रुपए की गिरती कीमत और बढ़ती मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए नीतिगत दरों में 0.5% की बढ़ोतरी का अनुमान भी जताया है।
''गोल्डमैन सैक्स'' ने पहले भारत की विकास दर 7% रहने का अनुमान लगाया था, जिसे 13 मार्च को घटाकर 6.5% किया गया और अब इसे और कम कर 5.9% कर दिया गया है। इस कटौती के पीछे मुख्य वजहें अमेरिका-ईरान जंग के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल को माना गया है। बैंक का मानना है कि तेल सप्लाई में यह व्यवधान अप्रैल के मध्य तक जारी रह सकता है। इससे महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। साल 2026 के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान 3.9% से बढ़ाकर 4.6% कर दिया गया है।
एक अनुमान के अनुसार आने वाले दिनों में देश का चालू खाता घाटा बढ़कर जीडीपी का 2% हो सकता है, जो अक्टूबर-दिसंबर 2025 में 1.3% था। रुपया 2026 में अब तक 4% टूट चुका, पिछले पूरे वर्ष 4.7% टूटा था। करेंसी के इस अवमूल्यन को रोकने के लिए गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक रेपो रेट में 0.5% की वृद्धि कर सकता है।
रुपये में बड़ी गिरावट के बीच, एक रिपोर्ट का सुझाव है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आगामी नीतिगत समीक्षा में रेपो रेट में 0.5% की बढ़ोतरी कर सकता है। यह कदम मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और मुद्रा की स्थिरता बनाए रखने के लिए हो सकता है। यदि ऐसा होता है, तो होम लोन और अन्य ऋण महंगे हो सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की 2026-27 के लिए पहली द्वि-मासिक बैठक 6-8 अप्रैल 2026 को निर्धारित है।
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