पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित शुभेंदु सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए राज्य के सभी सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त मदरसों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम को अनिवार्य कर दिया है।
कोलकाता (पश्चिम बंगाल)। पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित शुभेंदु सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए राज्य के सभी सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त मदरसों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम को अनिवार्य कर दिया है। इससे पहले शुभेंदु सरकार ने 14 मई 2026 को स्कूल शिक्षा विभाग के तहत आने वाले सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में वंदे मातरम को अनिवार्य किया था। अब इसी नीति को बढ़ाते हुए इसे मदरसों में भी लागू कर दिया गया है।
हुमायूं कबीर ने जताई कड़ी आपत्ति
हालांकि सरकार के इस फैसले से कुछ समितियों में नाराजगी भी देखने को मिली है। वंदे मातरम् का ये विरोध कोई नया नहीं है और ना ही बंगाल सरकार का ये कोई नया फैसला है। इससे पहले केंद्र सरकार ने 11 फरवरी को राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए थे। अब TMC से अलग होकर नई पार्टी बनाने वाले हुमायूं कबीर ने भी इस पर आपत्ति जताई है।
'जन गण मन' के बराबर दर्जे की तैयारी
वंदे मातरम् को लेकर अभी भले ही सजा का प्रावधान ना हो लेकिन भविष्य में ऐसा हो सकता है क्योंकि पिछले दिनों पश्चिम बंगाल और असम में अपनी शानदार जीत के बाद पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गान जन गण मन के बराबर का दर्जा देने का फैसला किया। अधिकारियों के मुताबिक, इसका मकसद वंदे मातरम् को भी उसी कानूनी दायरे में लाना है जिसके तहत अभी राष्ट्रीय गान को सुरक्षा मिली हुई है।
अपमान करने पर होगी न्यायिक कार्रवाई
एक बार लागू होने के बाद वंदे मातरम गाए जाने के दौरान किसी भी तरह का अपमान या बाधा डालना एक न्यायिक सुनवाई योग्य अपराध माना जाएगा। गौरतलब है कि बंगाल सरकार ने स्कूलों और मदरसों दोनों में अब वंदे मातरम् अनिवार्य कर दिया है। हालांकि इस पर सियासी वार-पलटवार का दौर जरुर जारी है।
यह भी पढ़ें: पंचायत चुनाव से पहले नए ओबीसी आयोग का गठन, नवंबर 2026 तक आएगी रिपोर्ट