प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

भारत ने सुधार की मांग दोहराई

मौजूदा चुनौतियों का समना नहीं कर पा रहा संयुक्त राष्ट्र

भारत के राजदूत पर्वतनेनी ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध में किए गए बलिदानों के आधार पर इस पुरानी और अप्रचलित व्यवस्था को हमेशा के लिए उचित नहीं ठहराया जा सकता।

मौजूदा चुनौतियों का समना नहीं कर पा रहा संयुक्त राष्ट्र

न्यूयार्क। भारत ने मंगलवार संयुक्त राष्ट्र में सुधार की मांगों को फिर दोहराया। उसने जोर देकर कहा-संगठन की रचनात्मकता और प्रभाव बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही उल्लेख किया कि संगठन समकालीन वैश्विक चुनौतियों का सामना नहीं कर पा रहा है यह 1940 के दशक में तैयार ढांचे का जमा रूप बन कर रह गया है।

वीटो पावर वाले देशों में मतभेद

चीन की अध्यक्षता में हुई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में वीटो का अधिकार रखने वाले स्थायी सदस्यों के बीच मतभेदों को उजागर किया। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि परिषद एक जीवंत संस्था होनी चाहिए, न कि कोई जीवाश्म जिसकी ‘स्थिर’ संरचना 1945 के कंप्यूटर संस्करण पर उन्नत कृत्रिम बद्धिमत्ता (एआई) संबंधी प्रौद्योगिकियों को चलाने के समान हो।

भाजन और टकराव से ग्रस्त है दुनिया

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र परिषद की सक्रियता का दौर अब समाप्त हो चुका है, और दुनिया अब विभाजन और टकराव से ग्रस्त है। वीटो अधिकार वाले स्थायी सदस्यों के स्तर पर परिषद विभाजित नजर आ रही है। संयुक्त राष्ट्र में कार्यकुशलता और उत्पादकता बढ़ाने की मांग पहले से कहीं अधिक प्रबल है।’पर्वतनेनी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ‘संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों को बनाए रखना और संयुक्त राष्ट्र-केंद्रित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करना’ विषय पर हो रही चर्चा को संबोधित कर रहे थे।

चीन के विदेश मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार सुबह इस विषय पर चर्चा के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता की। उल्लेखनीय है कि अमेरिका, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन, और चीन ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ के वीटो का अधिकार रखने वाले पांच स्थायी सदस्य हैं। पर्वतनेनी ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध में किए गए बलिदानों के आधार पर इस पुरानी और अप्रचलित व्यवस्था को हमेशा के लिए उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि विजयी मित्र देशों ने स्थायी सदस्य के रूप में वीटो अधिकार बनाए रखा है।

इसे भी पढ़ेंः रूस में बना इबोला के नए स्ट्रेन के खिलाफ टीका

Related to this topic: