प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

डोनाल्ड ट्रम्प का बड़ा धर्मसंकट

फारस की खाड़ी को लेकर ट्रम्प पर दबाव, इज़रायल लॉबी बनी बड़ी चुनौती

पश्चिम एशिया में अमेरिकी दखल को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस समय बेहद मुश्किल राजनीतिक धर्मसंकट में फंस चुके हैं।

फारस की खाड़ी को लेकर ट्रम्प पर दबाव इज़रायल लॉबी बनी बड़ी चुनौती

Trump Under Pressure Over Gulf Policy Amid Israel Lobby Influence |

वॉशिंगटन (अमेरिका)। पश्चिम एशिया में अमेरिकी दखल को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस समय बेहद मुश्किल राजनीतिक धर्मसंकट में फंस चुके हैं। अमेरिकी सेना के रिटायर्ड कर्नल और भू-राजनीतिक जोखिम सलाहकार डगलस मैकग्रेगर ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। मैकग्रेगर के मुताबिक, अगर ट्रम्प फारस की खाड़ी में सैन्य अभियानों को रोकने की कोशिश करते हैं तो अमेरिका में सक्रिय ताकतवर इजरायल समर्थक गुट उनके खिलाफ मोर्चा खोल सकते हैं।

फारस की खाड़ी से पैर पीछे खींचना ट्रम्प के लिए आसान नहीं

समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बातचीत के दौरान मैकग्रेगर ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आम अमेरिकी नागरिकों को फारस की खाड़ी के घटनाक्रम से कोई खास दिलचस्पी नहीं है। अगर ट्रम्प कल सुबह ही वहां सैन्य ऑपरेशन रोकने का फैसला कर लें, तो अमेरिकी जनता इसका तुरंत समर्थन करेगी। लेकिन ट्रम्प के लिए असली मुसीबत देश के भीतर बैठा इजरायली लॉबी का वो रसूखदार तबका है, जो अरबों डॉलर के दम पर अमेरिकी सियासत को अपनी उंगलियों पर नचाता है।

रसूखदार इजरायली एजेंटों की सीधी धमकी

कर्नल मैकग्रेगर का दावा है कि अमेरिका में मौजूद इजरायल के अरबपति एजेंट राष्ट्रपति को सीधे तौर पर यह कहने की हैसियत में हैं कि 'अगर आपने सैन्य ऑपरेशन रोका, तो हमारा राजनीतिक और आर्थिक समर्थन आपके लिए हमेशा के लिए बंद हो जाएगा।'

अमेरिका पर मंडरा रहा है बड़ा ऊर्जा संकट

मैकग्रेगर ने चेतावनी देते हुए कहा कि तेल और गैस सेक्टर के दिग्गजों ने पहले ही खतरे की घंटी बजा दी है। एक्सॉन (Exxon) के कार्यकारी उपाध्यक्ष और कई बड़े वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि अगर इस क्षेत्र में तनाव जारी रहा, तो अगले तीन से आठ हफ्तों के भीतर अमेरिका का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व पूरी तरह खाली हो जाएगा। हैरानी की बात यह है कि किसी ने राष्ट्रपति ट्रम्प को यह तक नहीं बताया कि कैलिफोर्निया जैसे बड़े राज्य की निर्भरता पूरी तरह फारस की खाड़ी से आने वाले आयातित तेल पर है। अगर आपूर्ति रुकी, तो पूरा अमेरिका गंभीर आर्थिक संकट में आ जाएगा।

ट्रम्प के पास है जनता को समझाने का मजबूत तर्क

मैकग्रेगर के अनुसार, ट्रम्प चाहें तो फारस की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही बहाल करने और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के नाम पर सैन्य ऑपरेशन रोकने के फैसले को सही ठहरा सकते हैं। अगर ट्रम्प सार्वजनिक रूप से यह कह दें कि एशिया, अफ्रीका, यूरोप और मिडिल ईस्ट के सभी दोस्त देश भी यही चाहते हैं इसलिए वे तत्काल प्रभाव से इन सैन्य ऑपरेशनों को सस्पेंड कर रहे हैं तो अमेरिकी जनता उनके इस फैसले को हाथों-हाथ लेगी।

ट्रम्प और नेतन्याहू की सोच में जमीन-आसमान का अंतर

इस पूरे विवाद में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का गणित बिल्कुल अलग है। मैकग्रेगर का दावा है कि ट्रम्प लगातार नेतन्याहू को अपने साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन नेतन्याहू इस समय खुद को एक बेहद मजबूतस्थिति में देख रहे हैं। नेतन्याहू को लगता है कि वाशिंगटन की नीति-निर्धारक व्यवस्था और अमेरिकी सेना पर इस वक्त उनका पूरा कंट्रोल है। ऐसे में वह इस ताकत को क्यों छोड़ेंगे? नेतन्याहू का मकसद सिर्फ और सिर्फ युद्ध को जारी रखना और ईरान को पूरी तरह तबाह करके पूरे क्षेत्र के लिए एक मिसाल कायम करना है।

क्या नेतन्याहू से दूरी बना पाएंगे डोनाल्ड ट्रम्प?

यही डोनाल्ड ट्रम्प का सबसे असली और बड़ा धर्मसंकट है। सवाल यह है कि क्या ट्रम्प खुद को इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के इस आक्रामक रणनीतिक मकसद से अलग कर पाएंगे? क्या वह कड़ा रुख अपनाते हुए यह कह पाएंगे कि 'बस बहुत हुआ, अब इसे यहीं रुकना होगा'? कर्नल मैकग्रेगर का मानना है कि अब तक ट्रम्प के रवैये से ऐसे कोई संकेत नहीं मिले हैं कि वह नेतन्याहू के दबाव से अलग हटकर ऐसा कोई साहसिक फैसला ले पाएंगे। (एएनआई)

यह भी पढ़ें: ईद के दिन युवक की चाकुओं से गोदकर हत्या, नामजद आरोपियों पर मुकदमा दर्ज

Related to this topic: