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प्रतिस्पर्धा आयोग ने 28 कंपनियों को भेजा नोटिस

स्टील उत्पादक कंपनियां कार्टेल बनाकर स्टील के दाम बढ़ाने की दोषी

देश की नामी गिरामी टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू, स्टील अथारिटी आफ इंडिया (सेल) समेत 28 प्रमुख स्टील कंपनियों पर कार्टेल बनाकर (सांठगांठ कर) कीमत तय करने का मामला सामने आया है।

स्टील उत्पादक कंपनियां कार्टेल बनाकर स्टील के दाम बढ़ाने की दोषी

स्टील उत्पादक कंपनियां कार्टेल बनाकर स्टील के दाम बढ़ाने की दोषी

प्रतिस्पर्धा आयोग ने 28 कंपनियों को भेजा नोटिस, लग सकता है जुर्माना

मुंबई।
देश की नामी गिरामी टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू, स्टील अथारिटी आफ इंडिया (सेल) समेत 28 प्रमुख स्टील कंपनियों पर कार्टेल बनाकर (सांठगांठ कर) कीमत तय करने का मामला सामने आया है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने जांच रिपोर्ट के आधार पर कंपनियों से जवाब मांगा है, साथ ही कंपनियों को वित्तीय ब्योरा भी देने के लिए कहा है। आयोग इन पर भारी जुर्माना लगा सकता है। 

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू, सेल सहित 28 कंपनियों को सांठगांठ करके स्टील के दाम बढ़ाने का दोषी पाया है। एक गोपनीय दस्तावेज मीडिया में उजागर होने से पता चला है कि ये साठगांठ 2015 से 2023 के बीच हुई। इन कंपनियों ने इस्पात (स्टील) की बिक्री कीमतों पर मिलीभगत करके एंटीट्रस्ट कानून का उल्लंघन किया है। आयोग ने जेएसडब्ल्यू के एमडी सज्जन जिंदल, टाटा स्टील के सीईओ टीवी नरेंद्रन और सेल के चार पूर्व चेयरपर्सन सहित 56 शीर्ष अधिकारियों को भी जिम्मेदार ठहराया है। सीसीआई ने इस्पात कंपनियों से 2023 तक के आठ वित्त वर्षों के ऑडिट किए गए वित्तीय विवरण प्रस्तुत करने को कहा है।

प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) इस कदाचार के मामले में दोषी कंपनियों और अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई कर सकता है। सीसीआई को प्रत्येक वर्ष की अनियमितता के लिए इस्पात कंपनियों पर उनके लाभ के तीन गुना या कारोबार के 10%, जो भी अधिक हो, तक का जुर्माना लगाने का अधिकार है। व्यक्तिगत अधिकारियों पर भी जुर्माना लगाया जा सकता है।

सीबीआई ने जांच में पाया मिलीभगत

सीसीआई की जांच में पाया गया है कि टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील और सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात विनिर्माता सेल ने उत्पादों के दाम तय करने के लिए आपस में मिलीभगत कर इस तरह से समझौते किए जो बाजार प्रतिस्पर्धा के खिलाफ हैं। मामले के जानकार सूत्रों ने इसकी जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि प्रतिस्पर्धा आयोग जांच रिपोर्ट का मूल्यांकन कर रहा है और इस मामले में अंतिम आदेश जारी नहीं किया है। सीसीआई द्वारा कार्टेल जैसे मामलों का विवरण उनके निष्कर्ष निकलने से पहले सार्वजनिक नहीं किया जाता। 

एक सूत्र ने बताया कि सीसीआई 2021 से ही स्टील क्षेत्र में गोलबंदी या सांठगांठ की जांच कर रहा था। सूत्र ने कहा 'जांच महानिदेशक द्वारा रिपोर्ट सौंप जाने के बाद सभी पक्षों की आपत्तियों और सुझाव के लिए सीसीआई एक प्रक्रियात्मक आदेश जारी करता है। आयोग ने अभी तक इस मामले में कोई अंतिम राय नहीं बनाई है।' इस बारे में पूछे जाने पर जेएसडब्ल्यू स्टील, टाटा स्टील और सेल का पक्ष जानने के लिए ईमेल किया गया मगर खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं आया।

सीमेंट कंपनियों पर भी लगते रहे हैं आरोप

इससे पहले सीमेंट कंपनियों पर भी कार्टेल बनाकर दाम तय करने के आरोप लगते रहे हैं। पिछले साल जनवरी में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मुंबई में एक कार्यक्रम में कहा था कि स्टील और सीमेंट उद्योग के 'सांठगांठ' देश और इसके बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक बड़ी समस्या हैं। उन्होंने कहा था, 'स्टील और सीमेंट उद्योग कुछ ही लोगों के हाथ में हैं। वे हमेशा साठगांठ कर कीमत तय करते हैं। उनका सांठगांठ देश के लिए एक बड़ी समस्या है।'

भारत दुनिया में स्टील का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और देश के बड़े स्टील उत्पादक कुल उत्पादन का आधे से ज्यादा स्टील उत्पादन करते हैं। बिगमिंट के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में देश में कुल क्रूड स्टील की क्षमता 21 करोड़ टन थी। इनमें जेएसडब्ल्यू स्टील की हिस्सेदारी 17.48 फीसदी, टाटा स्टील की 13.29 फीसदी और सेल की हिस्सेदारी 10.10 फीसदी थी।

2021 में शुरु हुई थी जांच

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सीसीआई की जांच 2021 में तब शुरू हुई जब बिल्डरों के एक समूह ने अदालत में मामला दायर कर आरोप लगाया था कि 9 कंपनियां मिलकर स्टील आपूर्ति को बाधित करने और कीमतें बढ़ाने का काम कर रही हैं। रॉयटर्स ने 2022 में बताया था कि सीसीआई ने उद्योग की जांच के दौरान कुछ छोटी स्टील कंपनियों पर छापा मारा था। सीसीआई के अक्टूबर के आदेश से पता चला कि बाद में जांच का दायरा बढ़ाकर 31 कंपनियों और उद्योग समूह के साथ-साथ उद्योग के दर्जनों अधिकारियों तक कर दिया गया।

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