Credit Card : देश में कर्ज लेकर घी पीने का प्रवृत्ति अब खत्म हो रही है। लोग रोजमर्रा के खरीद फरोख्त में क्रेडिट कार्ड के मुकाबले डेबिट कार्ड के माध्यम से बैंकों में जमा धन खर्च करने में ज्यादा..
डेबिट कार्ड से लेन - देन 137 प्रतिशत बढ़ा, क्रेडिट कार्ड में आई 61 प्रतिशत की गिरावट
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Credit Card : देश में कर्ज" लेकर घी पीने" का प्रवृत्ति अब खत्म हो रही है। लोग रोजमर्रा के खरीद फरोख्त में क्रेडिट कार्ड के मुकाबले डेबिट कार्ड के माध्यम से बैंकों में जमा धन खर्च करने में ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और यूपीआई से भुगतान के ताजा जारी आंकड़ों से ये जानकारी सामने आई है। त्योहारी सीजन के दौरान कारोबार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, डेबिट कार्ड से भुगतान में कई गुना वृद्धि दर्ज की गयी जबकि क्रेडिट कार्ड का शेयर काफी घट गया। मिले डिटा के मुताबिक डेबिट कार्ड से लेनदेन हाल में 137% बढ़ा है, जबकि क्रेडिट कार्ड के शेयर में 61% की गिरावट देखने को मिली है। इस दौरान यूपीआई से भी भुगतान रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया।
फेस्टिव सीजन में एक खास ट्रेंड रहा। शॉपिंग करते वक्त लोगों ने क्रेडिट यानी उधारी पर नियंत्रण रखा। फिर भी कुल रिटेल पेमेंट 14.6% बढ़कर 18.8 लाख करोड़ हो गया। बीते साल दशहरा-दिवाली में 16.4 लाख करोड़ का पेमेंट हुआ था। बैंक ऑफ बड़ौदा रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, त्योहारों में डेबिट कार्ड से लेनदेन पिछले साल के मुकाबले 137% बढ़कर 65,395 करोड़ रुपए हो गया। दूसरी तरफ क्रेडिट कार्ड से 61% घटकर 39,045 करोड़ रह गया।
सितंबर के आंकड़ों में जीएसटी के स्लैब और दरें घटने का पूरा असर नहीं दिखा
इस बीच यूपीआई के जरिये लेनदेन 18% बढ़कर 17.8 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि सितंबर के आंकड़ों में जीएसटी के स्लैब और दरें घटने का पूरा असर नहीं दिखा, क्योंकि कुछ खरीदारियां अक्टूबर तक टाली गई। त्योहारी सीजन में प्रति लेनदेन सबसे ज्यादा 8,084 रुपए डेबिट कार्ड के जरिये खर्च किए गए। क्रेडिट कार्ड से 1,932 व यूपीआई से औसत 1,052 रुपए रहा। कपड़ों के बिजनेस 68.5%, किराने का 37% और इलेक्ट्रॉनिक्स का 21% बढ़ा। ऑनलाइन बिजनेस में 64% इजाफा हुआ।
जीएसटी-2.0 से 20 लाख करोड़ की खपत
बैंक ऑफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री दीपान्विता मजूमदार के मुताबिक, इस साल त्योहारों में डेबिट से खर्च बढ़ने का मतलब है कि लोग अपनी बचत से शॉपिंग को तरजीह दी, उधारी कम ही रखना बेहतर समझा। टीवी, एसी, डिशवॉशर, रेफ्रिजरेटर जैसे प्रोडक्ट्स पर टैक्स में कटौती का असर अक्टूबर-दिसंबर में दिखेगा। जीएसटी-2.0 से 20 लाख करोड़ की खपत बढ़ने की उम्मीद जताई गई है।
त्योहारों में खरीदारी और कारोबार में उछाल से यूपीआई लेनदेन मूल्य और संख्या के लिहाज से अक्तूबर में नए शिखर पर पहुंच गया। इस दौरान 27.28 लाख करोड़ रुपये के 20.7 अरब लेनदेन हुए। यह मूल्य व संख्या के लिहाज से मासिक आधार पर क्रमशः 10 एवं पांच फीसदी अधिक है। सितंबर में 24.9 लाख करोड़ रुपये के 19.63 अरब लेनदेन हुए थे। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के मुताबिक, अक्तूबर में रोज औसतन 66.8 करोड़ यूपीआई लेनदेन हुए, जिनका मूल्य 87,993 करोड़ रुपये रहा।
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