Banking system : भारत में बैंकिंग सिस्टम को सुरक्षित बनाने और ग्राहकों को संभावित फ्राड से बचाने के लिए दूरसंचार संचार विभाग ने टेलीफोन कॉल..
Banking system : भारत में बैंकिंग सिस्टम को सुरक्षित बनाने और ग्राहकों को संभावित फ्राड से बचाने के लिए दूरसंचार संचार विभाग ने टेलीफोन काल के लिए '1600' सिरीज के नंबर अपनाने का सुझाव दिया है। देश के सभी बैंकों, वित्तीय कंपनियों, शेयर ब्रोकरों को ग्राहकों को काल करने के लिए इस सिरीज के नंबरों का उपयोग करने की डेडलाइन भी तय कर दी है।
इसका उद्देश्य स्पैम कॉल और वॉइस कॉल के जरिए होने वाले फ्रॉड को रोकना है, जिससे देश में व्यापक स्तर पर वित्तीय धोखाधड़ी को रोक जा सके और यूजर्स के लिए वित्तीय माहौल और सुरक्षित हो सके। मालूम हो कि देश के सभी बैंक और वित्तीय संस्थान खात का बैलेंस या सर्विस की जानकारी देने के लिए मोबाइल संदेश (मैसेज) भेजने के लिए सुरक्षित कोड वाली श्रृंखला अपना ली है, लेकिन अभी ग्राहकों को काल करने के लिए 10 अंकों के मोबाइल नंबर या लैंडलाइन कनेक्शन का उपयोग करते हैं।
इससे बैंक या संस्थान से काल आने का उपभोक्ताओं को आभास नहीं होता। इसे देखते हुए टेलीकॉम नियामक आयोग "ट्राई" ने सभी बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा संस्थाओं (बीएफएसआइ) को निर्देश दिया कि वे सर्विस और लेनदेन संबंधी कॉल के लिए एक जनवरी, 2026 से चरणबद्ध समयसीमा के तहत नई '1600' नंबर वाली श्रृंखला अपनाएं।
"ट्राई" की पहल के तहत 1600 नंबर की सीरीज दूरसंचार विभाग द्वारा बीएफएसआई सेक्टर को आवंटित की गई है। इससे लोगों को वित्तीय संस्थाओं से सही और विश्वसनीय कॉल मिलेंगे। "ट्राई" द्वारा जारी दिशानिर्देंशों में कहा गया कि सभी म्यूचुअल फंड्स और एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (एएमसी) को 15 फरवरी, 2026 तक 1600 नंबरिंग सीरीज को अपनाना अनिवार्य है। वहीं, क्वालिफाइड स्टॉकब्रोकर्स (क्यूएसबी) को 1600 नंबर की सीरीज को 15 मार्च, 2026 तक अपनाना होगा।
निर्देश में कहा गया है कि फिलहाल, अन्य सेबी-पंजीकृत मध्यस्थ अपने पंजीकरण विवरणों के सत्यापन के बाद स्वेच्छा से 1600 सीरीज में स्थानांतरित हो सकते हैं। वाणिज्यिक बैंकों (सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, निजी क्षेत्र के बैंकों और विदेशी बैंकों सहित) को 1 जनवरी, 2026 तक 1600 सीरीज अपनानी होगी।
निर्देश में कहा गया है कि 5,000 करोड़ रुपए से अधिक की एसेट वैल्यू वाली बड़ी एनबीएफसी, पेमेंट्स बैंक और स्मॉल फाइनेंस बैंकों को 1 फरवरी, 2026 तक इसमें शामिल होना होगा, जबकि बाकी एनबीएफसी, सहकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और छोटी संस्थाओं को 1 मार्च, 2026 तक इसमें शामिल होना होगा।
साथ ही केंद्रीय रिकॉर्ड रखने वाली एजेंसियां और पेंशन फंड मैनेजर्स को इसमें 15 फरवरी, 2026 तक शामिल होना होगा। बीमा कंपनियों के लिए 1600 नंबर श्रृंखला अपनाने की समय सीमा पर बीमा नियामक आयोग (आईआरडीएआई) के साथ वार्ता चल रही है। 485 संस्थानों ने पहले ही 1600 श्रृंखला अपना लिया है।
"ट्राई" ने आरबीआई, सेबी और पीएफआरडीए की ओर से रेगुलेटेड कंपनियों को दिये गये निर्देश का मकसद फर्जी, वित्तीय धोखाधड़ी और डिजिटल अरेस्ट पर अंकुश लगाना है। हाल के दिनों में यह तेजी से उभरता हुआ साइबर अपराध बन गया है, जहां धोखेबाज अक्सर वॉयस और वीडियो कॉल के जरिए लोगों से पैसे ऐंठने के लिए सरकारी या प्रवर्तन अधिकारी होने का दावा करते हैं।
नंबर की शुरुआत 1600 से करने को अनिवार्य करने लोगों के लिए कॉलर की पहचान करना आसान हो जाएगा। इस कवायद से अनचाहे वाणिज्यिक कॉलों के जरिए धोखेबाजों के हाथों ठगे जाने की संभावना कम हो जाएगी।
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