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बैंकों के लिए एनपीए संपत्ति अधिग्रहण आसान

बैंकों के लिए अब एनपीए हो चुकी सम्पत्तियों का अधिग्रहण होगा आसान

मुंबई। देश में बैंक अब कर्ज नहीं चुकाने वाले (NPA) कर्जदारों की गिरवी सम्पत्ति को आसानी से कब्जे में ले सकेंगे।

बैंकों के लिए अब एनपीए हो चुकी सम्पत्तियों का अधिग्रहण होगा आसान

India Finance |

मुंबई। देश में बैंक अब कर्ज नहीं चुकाने वाले (NPA) कर्जदारों की गिरवी सम्पत्ति को आसानी से कब्जे में ले सकेंगे। Reserve Bank of India ने बैंकों और NBFCs के लिए कर्ज वसूली से जुड़े नए नियमों को आसान बनाने का मसौदा पेश किया है। इसका मकसद एनपीए यानी गैर-निष्पादित आस्ति (Non-Performing Asset - NPA) हो चुके लोन की रिकवरी तेज करना और फंसी हुई रकम वसूलना है। आरबीआई ने इस पर 26 मई तक सुझाव आमंत्रित किये हैं।

गिरवी संपत्ति पर बैंक का कब्जा संभव

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा पेश किये गये मसौदा के तहत अब बैंक डूब चुके कर्ज (NPA) की वसूली के लिए गिरवी रखी गई जमीन या मकान जैसी अचल संपत्तियों को अपने कब्जे में ले सकेंगे। नए प्रस्तावित नियम के तहत जब कोई व्यक्ति या कंपनी बैंक का लोन नहीं चुका पाती और लोन NPA बन जाता है, तो बैंक पैसे वापस पाने के लिए उसकी गिरवी रखी प्रॉपर्टी अपने नाम कर सकता है। ऐसे मामलों में उस प्रॉपर्टी को SNFA (Specified Non-financial Asset) कहा जाएगा। बैंक इस प्रॉपर्टी को पूरे या आंशिक बकाया के बदले ले सकता है। अगर पूरा लोन खत्म नहीं हुआ, तो बचा हुआ लोन “रिस्ट्रक्चर्ड” माना जाएगा।

वैल्यू निर्धारण के नए नियम

आरबीआई के प्रस्ताव के अनुसार बैंकिंग एकाउंटिंग के लिहाज से SNFA को हमेशा दो में से कम वैल्यू पर दर्ज किया जाएगा—या तो जिस लोन का बकाया खत्म किया गया उसकी नेट बुक वैल्यू (NBV), या फिर उस संपत्ति की मौजूदा डिस्ट्रीस सेल वैल्यू (यानी जल्दी बेचने पर मिलने वाली कीमत)। आगे हर रिपोर्टिंग डेट पर भी इसकी वैल्यू दो में से कम ही मानी जाएगी। पिछली डिस्ट्रीस वैल्यू या फिर संशोधित NBV (जिसमें काल्पनिक प्रावधान घटाए गए हों, मानो लोन अभी भी बैलेंस शीट में होता)।

सात साल में बेचना होगा अनिवार्य

हालांकि, बैंक इन संपत्तियों को हमेशा के लिए नहीं रख पाएंगे। उन्हें सात साल के भीतर इन्हें बेचना होगा। यह नियम उन खास हालातों के लिए हैं जब कर्ज वसूली की प्रक्रिया के तहत ऐसी संपत्तियों को अपने हाथ में लेना पड़ता है। यह कदम तब उठाया जाएगा जब लोन वसूली के अन्य सभी कानूनी उपाय विफल हो जाएं। आरबीआई ने इस पर 26 मई तक सुझाव मांगे हैं।

वसूली प्रक्रिया होगी तेज और पारदर्शी

आम तौर पर, इन संस्थानों से यह उम्मीद नहीं की जाती कि वे अपने कर्ज देने के कारोबार के बदले किसी प्रॉपर्टी जैसी संपत्ति पर कब्जा करें। हालांकि, कुछ खास मामलों में जब कर्ज डूब जाता है तब ये संस्थान वसूली की रणनीति के तौर पर उस अचल संपत्ति का मालिकाना हक ले सकते हैं, जिसे सिक्योरिटी के तौर पर रखा गया था।

SNFA को लेकर नई व्यवस्था

RBI ने स्पेसिफाइड नॉन-फाइनेंशियल असेट्स (SNFA) पर जारी इन निर्देशों के मसौदे में कहा है कि ऐसी संपत्तियों को सही समय पर और पारदर्शी तरीके से बेचने से संस्थानों को अपना ज्यादा से ज्यादा पैसा वसूलने में मदद मिलेगी। SNFA का मतलब उस अचल संपत्ति से है, जिसे कोई बैंक या संस्थान उधार लेने वाले से अपने पैसे वसूलने के लिए अपने कब्जे में लेता है। इसमें नॉन-बैंकिंग असेट्स (NBAs) भी शामिल हैं।

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