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कृषि क्षेत्र में मांग बढ़ने से उर्वरक आयात में 41 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान

देश के विभिन्न हिस्सों में इस बार अच्छी बारिश के फलस्वरूप वर्ष 2025-26 में कृषि क्षेत्र में मांग बढ़ने के कारण उर्वरकों के आयात में 41 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।

कृषि क्षेत्र में मांग बढ़ने से उर्वरक आयात में 41 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान

Fertilizer imports are expected to rise by 41% due to increased demand in the agricultural sector |

नई दिल्ली। देश के विभिन्न हिस्सों में इस बार अच्छी बारिश के फलस्वरूप वर्ष 2025-26 में कृषि क्षेत्र में मांग बढ़ने के कारण उर्वरकों के आयात में 41 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। हालांकि पिछले कुछ दिनों में रुपये में तेज गिरावट के कारण भारत में उर्वरक आयात व उत्पादन के व्यय में बढ़ोतरी हो सकती है। खासकर यूरिया के आयात पर खर्च बढ़ने का अनुमान है। 

भारत का उर्वरक आयात 41 प्रतिशत बढ़कर 2.23 करोड़ टन होने का अनुमान

भारतीय उर्वरक संघ (एफएआई) ने बताया कि पिछले दिनों देश में अच्छी बारिश के बाद घरेलू मांग में वृद्धि के कारण 2025-26 में भारत का उर्वरक आयात 41 प्रतिशत बढ़कर 2.23 करोड़ टन होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि अप्रैल-अक्तूबर के दौरान 1.44 करोड़ टन का आयात हुआ था। एक साल पहले 85 लाख टन की तुलना में 69 प्रतिशत अधिक है। एफएआई चेयरमैन एस शंकरसुब्रमण्यन ने कहा, अच्छी बारिश के चलते घरेलू मांग में वृद्धि के कारण उर्वरकों के आयात में वृद्धि हुई है। नवंबर के अंत तक उर्वरक भंडार एक करोड़ टन था। एक वर्ष पहले यह 99.7 लाख टन था। इसमें 50 लाख टन यूरिया, 17 लाख टन डीएपी और 35 लाख टन एनपीके उर्वरक शामिल हैं। 

भारत में पिछले दो महीनों में बड़े पैमाने पर देखी गई उत्पादन में गिरावट

शंकरसुब्रमण्यन ने बताया, भारत में पिछले दो महीनों में बड़े पैमाने पर उत्पादन में गिरावट देखी गई है और आपूर्ति में कोई बाधा नहीं है। खरीफ सीजन के दौरान कुछ जगहों पर कमी जरूर रही, लेकिन कुल मिलाकर आपूर्ति पर्याप्त रही। अप्रैल-अक्तूबर में घरेलू उर्वरक उत्पादन मामूली रूप से बढ़कर 2.99 करोड़ टन हो गया, जो एक साल पहले 2.97 करोड़ टन था। उत्पादन में 1.71 करोड़ टन यूरिया, 23 लाख टन डीएपी, 70 लाख टन एनपीके उर्वरक और 34.8 लाख टन एसएसपी शामिल थे।

रुपये में तेज गिरावट के कारण भारत की उर्वरक सब्सिडी में हो सकता है इजाफा

इस बीच एक आकलन के अनुसार पिछले कुछ दिनों में रुपये में तेज गिरावट के कारण भारत की उर्वरक सब्सिडी में और इजाफा हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर रुपया न केवल विनिर्मित वस्तुओं के आयात को महंगा करेगा बल्कि घरेलू उत्पादन की लागत भी बढ़ेगी। खासतौर पर यूरिया की क्योंकि उसकी उत्पादन लागत का 85 से 90 फीसदी आयातित गैस है जिसकी कीमत डॉलर में होती है। डाई-अमोनिया फॉस्फेट (डीएपी) बनाने में लगने वाला कच्चा माल, यानी रॉक फॉस्फेट या फॉस्फोरिक एसिड, महंगा हो जाएगा। भारत डीएपी बनाने के लिए जरूरी सभी रॉक फॉस्फेट और फॉस्फोरिक एसिड का आयात करता है।

उद्योग जगत के आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच, भारत ने पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 137 प्रतिशत अधिक यूरिया आयात किया है, जबकि डीएपी का आयात भी अप्रैल-अक्टूबर 2024 की तुलना में लगभग 69 प्रतिशत अधिक रहा है। इसी अवधि में एनपी/एनपीकेएस के आयात में भी लगभग 81 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों और उद्योग जगत के लोगों का कहना है कि कंपनियां इस अतिरिक्त बोझ को उपभोक्ताओं पर नहीं डाल पाएंगी, खासकर यूरिया और डीएपी जैसे उर्वरकों के मामले में, जिनकी कीमतें पहले से निर्धारित होती हैं।

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