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ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी

'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर युद्ध विशेषज्ञ टॉम कूपर ने भारत की कार्रवाई को बताया 'स्पष्ट सैन्य जीत'

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा शुरू ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को एक साल पूरा होने को है। ऑस्ट्रिया के इतिहासकार व युद्ध विशेषज्ञ टॉम कूपर ने भारत की कार्रवाई को स्पष्ट सैन्य जीत बताया है।

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर युद्ध विशेषज्ञ टॉम कूपर ने भारत की कार्रवाई को बताया स्पष्ट सैन्य जीत

Historian Tom Cooper Terms India's Response a Decisive Victory |

वियना (आस्ट्रया)। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा शुरू ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को एक साल पूरा होने को है। इससे पहले ऑस्ट्रिया के इतिहासकार व युद्ध विशेषज्ञ टॉम कूपर ने भारत की कार्रवाई को स्पष्ट सैन्य जीत बताया। एक भेंटवार्ता में कूपर ने कहा-'इस टकराव में भारत ने न सिर्फ सैन्य स्तर पर पड़ोसी को पछाड़ा, बल्कि अपनी सटीक-संतुलित कार्रवाई से मजबूत रणनीतिक संदेश भी दिया। उनका कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत किए गए हमले रणनीतिक रूप से बेहद प्रभावी थे।

आतंकी ठिकानों पर अचूक प्रहार और रणनीतिक बदलाव

कूपर ने कहा कि भारत ने पाकिस्तान व पीओके में बड़े आतंकी ठिकानों पर सफल जवाबी हमले किए। इनमें ऐसे ठिकानों को भी निशाना बनाया गया, जो पहले भारत की पहुंच से बाहर माने जाते थे। कूपर ने कहा, इन हमलों से भारी क्षति हुई और पाकिस्तान को रक्षात्मक होना पड़ा। उन्होंने कहा- भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि वह पाकिस्तान में किसी भी लक्ष्य पर निशाना साध सकता है, उसे रोका नहीं जा सकता। यह भारत की रणनीतिक सोच में बड़ा बदलाव है। जब उनसे पूछा गया कि इस टकराव में किसकी जीत हुई, तो उन्होंने साफ कहा कि विजेता पूरी तरह भारत रहा।

पाकिस्तानी जवाबी हमले रहे नाकाम

पिछले वर्ष सात मई की रात भारत की ओर से आतंकी ढांचे पर हमले के बाद पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की कोशिश की। उसने अमृतसर सहित कई क्षेत्रों में भारतीय एयरबेस, सैन्य ठिकानों और नागरिक इलाकों को निशाना बनाने का प्रयास किया। हालांकि, कूपर ने कहा कि पाकिस्तान की यह कोशिशें अपने उद्देश्य हासिल करने में विफल रहीं। भारत की वायु रक्षा प्रणालियों ने प्रभावी ढंग से पाकिस्तान के 95-98 प्रतिशत रॉकेट, मिसाइल व ड्रोनों को नष्ट कर दिया।

पाकिस्तानी सेना की आंतरिक राजनीति और अस्तित्व की जंग

कूपर ने पाकिस्तान के हालात का भी जिक्र किया। वह बोले, वहां की सशस्त्र सेनाओं को अपना प्रभुत्व बनाए रखने के लिए सरकार के सामने अपनी भूमिका को उचित ठहराना पड़ता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में सैन्य ताकत की छवि बनाए रखना आंतरिक राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और जनता को यह बताया जाता है कि सेना का मजबूत और प्रभावी रहना जरूरी है।

पाकिस्तान की चीनी हथियारों पर निर्भरता

चीन की भूमिका पर कूपर ने कहा कि पाकिस्तान ने अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए चीनी प्लेटफॉर्म जैसे जे-10 लड़ाकू विमान और पीएल-15 मिसाइलों का सहारा लिया, जो दीर्घकालिक समाधान नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान गंभीर आर्थिक दबाव में है और बाहरी सहायता के बिना बड़े पैमाने पर रक्षा खरीद को लंबे समय तक बनाए रखना उसके लिए संभव नहीं है। वह बोले, कई बड़े निवेश प्रोजेक्ट अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाए हैं।

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