मध्य प्रदेश के श्योपुर ज़िले में स्थित कूनो नेशनल पार्क के जंगल में भारत में जन्मी एक मादा चीता ने चार शावकों को जन्म दिया है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस घटना को एक ऐतिहासिक पल बताया।
नई दिल्ली/श्योपुर। भारत की महत्वाकांक्षी चीता पुनर्वास परियोजना ने एक अहम पड़ाव हासिल कर लिया है। मध्य प्रदेश के श्योपुर ज़िले में स्थित कूनो नेशनल पार्क के जंगल में भारत में जन्मी एक मादा चीता ने चार शावकों को जन्म दिया है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के ज़रिए यह जानकारी साझा की और इस घटना को एक ऐतिहासिक पल बताया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि 25 महीने की इस चीता ने जंगल में एक साल से ज़्यादा समय बिताने के बाद शावकों को जन्म दिया है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया संरक्षण यात्रा का बड़ा मील का पत्थर
केंद्रीय मंत्री ने X पर एक पोस्ट में कहा, "कूनो का ऐतिहासिक पल! कूनो नेशनल पार्क में एक ऐतिहासिक घटना घटी है। 'गामिनी' नाम की 25 महीने की एक भारतीय मूल की मादा चीता ने जंगल में चार शावकों को जन्म दिया है। यह भारत की चीता संरक्षण यात्रा में एक बड़ा मील का पत्थर है। जंगल में एक साल से ज़्यादा समय बिताने के बाद, 2022 में पुनर्वास शुरू होने के बाद से जंगल में यह पहला दर्ज जन्म है। खास बात यह है कि यह किसी भारतीय मूल की मादा चीता द्वारा दिया गया पहला जन्म है।"
टीम की मेहनत लाई रंग, देश के लिए गर्व का पल
उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय कूनो में तैनात वन्यजीव प्रबंधकों, पशु चिकित्सकों और फील्ड स्टाफ के लगातार प्रयासों को दिया। उन्होंने इसे राष्ट्र के लिए गर्व का क्षण बताया और संरक्षण की इस पहल में शामिल सभी लोगों को बधाई दी। उन्होंने अपने पोस्ट में आगे कहा कि, "यह परियोजना के मुख्य उद्देश्यों—प्राकृतिक परिस्थितियों में जीवित रहना और प्रजनन करना—को हासिल करने की दिशा में एक अहम कदम है। यह उपलब्धि भारतीय परिस्थितियों के प्रति चीतों के बढ़ते तालमेल को दर्शाती है। कूनो के प्रबंधकों, पशु चिकित्सकों और फील्ड स्टाफ के समर्पण और अथक प्रयासों का प्रमाण है। राष्ट्र के लिए गर्व का क्षण—सभी को हार्दिक बधाई।"
मध्य प्रदेश बना चीतों के पुनर्वास का नया केंद्र
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी इस उपलब्धि पर खुशी ज़ाहिर की। उन्होंने कूनो के प्रबंधकों तथा वन्यजीव पशु चिकित्सकों को बधाई दी। उन्होंने अपने एक 'एक्स' पोस्ट में कहा कि, "मध्य प्रदेश अब चीतों के 'पुनरुद्धार' के लिए एक अहम केंद्र के तौर पर उभर रहा है। 25 महीने की भारत में जन्मी एक मादा चीता का जंगल में चार शावकों को जन्म देना इस बात का सबूत है कि मध्य प्रदेश की धरती चीतों की आबादी के विस्तार के लिए पूरी तरह से अनुकूल है। प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता सफल साबित हो रही है। कूनो नेशनल पार्क के प्रबंधकों और वन्यजीव पशु चिकित्सकों को मेरी ओर से हार्दिक बधाई।"
विलुप्त प्रजाति को फिर बसाने की पहल
गौरतलब है कि 'प्रोजेक्ट चीता' भारत का दुनिया का पहला अंतरमहाद्वीपीय स्थानांतरण प्रोजेक्ट है। इसे 17 सितंबर, 2022 को शुरू किया गया था। इस प्रोजेक्ट का मकसद भारत में चीतों को फिर से बसाना था जो 1952 में देश से विलुप्त हो गए थे।
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