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सोलर प्लेट उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा भारत

सौर ऊर्जा में आत्मनिर्भर बनेगा भारत, पॉलिसिलिकन निर्माण के लिए PLI योजना की तैयारी

सरकार ने पारंपरिक ऊर्जा पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। पॉलिसिलिकन के घरेलू उत्पादन को अब PLI योजना में शामिल किया जाएगा।

सौर ऊर्जा में आत्मनिर्भर बनेगा भारत पॉलिसिलिकन निर्माण के लिए pli योजना की तैयारी

India Pushes Solar Self-Reliance with Polysilicon Push Under PLI Scheme |

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने परम्परागत ऊर्जा पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक ऊर्जा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए पॉलिसिलिकन के घरेलू विनिर्माण को उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना में शामिल करने का निर्णय लिया है। इससे सोलर प्लेट का आयात कम होगा सौर ऊर्जा के क्षेत्र में देश आत्मनिर्भर बनेगा। पॉलीसिलिकॉन (Polysilicon) रेत (नदियों के बालू) से बनने वाला उच्च शुद्धता वाला बहुक्रिस्टलीय सिलिकॉन है, जो कई छोटे सिलिकॉन क्रिस्टल से बना होता है। पॉलिसिलिकन असल में सिलिकन का बेहद शुद्ध रूप है।

क्या होता है पॉलिसिलिकन और क्यों है यह खास

इसे सौर फोटोवोल्टिक (PV) पैनलों और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग (जैसे माइक्रोचिप्स) के लिए मुख्य कच्चा माल माना जाता है। इसमें सौर ऊर्जा के लिए सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करने की क्ष्मता बहुत अधिक होती है। इसे भारत व अन्य देशों में बहुतायत में नदियों के किनारे पाये जाने वाली क्वार्ट्ज रेत को 2000°C से अधिक तापमान पर शुद्ध करके, गैस में बदलकर और फिर विघटित करके बनाया जाता है। बाद में उसे वेफर्स सौर सेल और आखिरकार फोटोवोल्टिक (पीवी) मॉड्यूल बनाने के लिए पिघलाया जाता है। सौर सेल (Solar Cells) और सेमीकंडक्टर (Microchips) के उत्पादन में इसका बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है। वैश्विक स्तर पर इसका 95 फीसदी से अधिक उपयोग सौर पैनलों के लिए प्राथमिक कच्चे माल के रूप में किया जाता है।

चीन का दबदबा, वैश्विक सप्लाई पर पकड़ मजबूत

चीन में पॉलीसिलिकॉन (Polysilicon) का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। कुल उत्पादन में चीन की कंपनियों की हिस्सेदारी 93 फीसदी से अधिक है। भारत भी देश में सोलर प्लेट के लिए पूरी तरह चीन पर निर्भर है। पर अब भारत सरकार आयात पर निर्भरता कम करने के लिए देश में पॉलीसिलिकन उत्पादन को बढावा देने के लिए विशिष्ट प्रोत्साहन योजना पर सक्रिय रूप से काम कर रही है।

24,000 करोड़ की PLI योजना से बढ़ेगा घरेलू उत्पादन

भारत सरकार सौर ऊर्जा आत्मनिर्भरता हेतु 24,000 करोड़ रुपये से अधिक की पीएलआई योजना के तहत पॉलीसिलिकन के घरेलू विनिर्माण को शामिल कर रही है। केन्द्रीय वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय पॉलिसिलिकन के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना शुरू करने पर विचार रहा है।

वैश्विक स्तर पर बेहद केंद्रित है पॉलिसिलिकन उद्योग

"बिज़नेस स्टैंडर्ड" की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक स्तर पर पॉलिसिलिकन उद्योग बेहद केंद्रित है जहां कुल उत्पादन में चीन की कंपनियों की हिस्सेदारी 93 फीसदी से अधिक है। यह क्षेत्र सौर फोटोवोल्टिक (पीवी) के लिए ही नहीं बल्कि सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए भी प्राथमिक फीडस्टॉक आपूर्तिकर्ता के रूप में कार्य करता है।

ALMM सूची-3 से बदलेगा सोलर सप्लाई चेन का ढांचा

पिछले महीने मंत्रालय ने इंगट्स और वेफर्स के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एएलएमएम सूची-3 पेश की थी। इसके तहत जून 2028 से सौर परियोजनाओं को इन घटकों को घरेलू आपूर्ति से हासिल करना होगा। इससे एक एकीकृत सौर आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा मिलेगा।

मंत्रालय की रणनीति और आत्मनिर्भरता पर जोर

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में सचिव संतोष कुमार सारंगी ने से बातचीत में कहा, 'हमने इन क्षेत्रों में पर्याप्त क्षमता निर्माण किया है। मगर हम अभी भी कुछ घटकों के लिए आयात पर निर्भर हैं। ऐसे में हम पॉलिसिलिकन विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक योजना पर वित्त मंत्रालय से बातचीत कर रहे हैं।' उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने पॉलिसिलिकन के लिए एएलएमएम पेश नहीं किया है क्योंकि वैश्विक स्तर पर इंगट्स-टू-मॉड्यूल मूल्य श्रृंखला पर सौर विनिर्माताओं का वर्चस्व है। वही कंपनियां पॉलिसिलिकन नहीं बना सकती हैं क्योंकि यह एक अलग क्षेत्र है।

भारत की सौर क्षमता और भविष्य की बड़ी उम्मीदें

यह कदम सोलर पैनल के लिए आयात पर निर्भरता (को कम करने और उच्च दक्षता वाले सौर मॉड्यूल (GW स्केल) के निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ी पहल मानी जा रही है। यह योजना सौर ऊर्जा मूल्य श्रृंखला के एक महत्त्वपूर्ण घटक के रूप में पॉलिसिलिकन के उत्पादन को बढ़ाएगी। फिलहाल भारत की सौर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता 172 गीगावॉट और सेल उत्पादन क्षमता लगभग 65 गीगावॉट है।

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