पश्चिम एशिया संकट और भारत में विनिर्माण और औद्योगिक उत्पादन में सुस्ती के बावजूद, सेवा क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य इंजन बनकर उभरा है।
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट और भारत में विनिर्माण और औद्योगिक उत्पादन में सुस्ती के बावजूद, सेवा क्षेत्र (Service Sector) भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य इंजन बनकर उभरा है। मजबूत घरेलू मांग के दम पर देश के सेवा क्षेत्र की गतिविधियां अप्रैल के महीने में बढ़कर पांच महीने के उच्च स्तर 58.8 पर पहुंच गईं। यह वृद्धि पिछले साल नवंबर के बाद सबसे अधिक है।
घरेलू मांग और ई-कॉमर्स से मिली रफ्तार
सेवा क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा क्षेत्र है, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 50 फीसदी से अधिक का योगदान देता है। एचएसबीसी इंडिया सेवा पीएमआई (HSBC India Services PMI) के ताजा मासिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि घरेलू मांग में मजबूती, ई-कॉमर्स गतिविधियों में वृद्धि और नए ऑर्डरों में सुधार के चलते अप्रैल में भारत की सेवा क्षेत्र की गतिविधि में अप्रैल 2026 में जोरदार तेजी आई है। इस तेजी से सेवा इंडेक्स बढ़कर पांच महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया है।
PMI के आंकड़ों में बड़ा उछाल
एचएसबीसी माह-दर-माह आधार पर पीएमआई के आंकड़े जारी करता है। पीएमआई का 50 से ऊपर रहना गतिविधियों में तेजी और इससे कम रहना गिरावट को दिखाता है। वहीं, 50 का स्तर स्थिरता का संकेत है। मौसमी रूप से समायोजित सूचकांक मार्च में 14 महीनों के निचले स्तर 57.5 पर पहुंचने के बाद अप्रैल में बढ़कर 58.8 हो गया। मार्च में इस सेक्टर का कारोबारी गतिविधि सूचकांक गिरकर 14 महीने के निचले स्तर 57.5 पर आ गया था। हालांकि इस दौरान नए निर्यात ऑर्डर में कमी आई, जिससे संकेत मिलता है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच मांग विदेशी बाजारों से घरेलू उपभोक्ताओं की ओर स्थानांतरित हो रही है।
इन सेक्टर्स ने दिखाई सबसे ज्यादा मजबूती
एचएसबीसी इंडिया सेवा पीएमआई सर्वे में शामिल कंपनियों ने कहा, प्रतिस्पर्धी कीमतें, लॉजिस्टिक्स सेवाओं में उछाल और ई-कॉमर्स की बढ़ती मांग से सेवा क्षेत्र में कारोबार को मजबूती मिली है। नए ऑर्डर और उत्पादन बढ़ोतरी में उपभोक्ता सेवाएं सबसे आगे रहीं। इसके बाद ट्रांसपोर्ट, सूचना और संचार का स्थान रहा।
महंगाई का दबाव बरकरार
अप्रैल में महंगाई (मुद्रास्फीति) की रफ्तार कुछ धीमी हुई है लेकिन यह ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। वहीं, उत्पाद के मूल्य से संबंधित मुद्रास्फीति निचले स्तर पर रही। खाना पकाने के तेल, अंडे, मांस और सब्जियों जैसी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के साथ-साथ गैस की कीमतों, श्रम लागत और गैस की कमी की खबरों के कारण लागत में वृद्धि हुई। कंपनियों ने बिक्री मूल्य तो बढ़ा दिए, लेकिन लागत का केवल एक हिस्सा ही ग्राहकों पर डाला गया, जिसके परिणामस्वरूप उत्पादन मूल्य मुद्रास्फीति तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई। कंपनियां अगले 12 महीनों में कारोबार बढ़ने को लेकर आशावादी हैं।
विदेशी बाजारों के बजाए घरेलू बाजर में बढ़ रही मांग
एचएसबीसी इंडिया की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा, निर्यात से जुड़े ऑर्डर कुछ कमजोर पड़े। यह संकेत है कि ईरान संकट के चलते मांग विदेशी बाजारों से हटकर घरेलू बाजार की ओर लौट रही है। रोजगार के मोर्चे पर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। इस साल की पहली तिमाही की शुरुआत में कंपनियों ने अधिक भर्तियां कीं। अस्थायी और जूनियर स्तर के कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई गई, ताकि काम के बोझ को संभाला जा सके।
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