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इंडिगो संकट से देशभर के यात्री परेशान

इंडिगो संकट से देशभर के यात्री हुए परेशान, उड्डयन मंत्रालय को करना पड़ा हस्तक्षेप

भारत की सबसे भरोसेमंद एयरलाइन मानी जाने वाली इंडिगो अचानक ऐसे संकट में फंस गई कि पूरा देश हिल गया।

इंडिगो संकट से देशभर के यात्री हुए परेशान उड्डयन मंत्रालय को करना पड़ा हस्तक्षेप

इंडिगो संकट से देशभर के यात्री परेशान |

भारत की सबसे भरोसेमंद एयरलाइन मानी जाने वाली इंडिगो अचानक ऐसे संकट में फंस गई कि पूरा देश हिल गया। जिस एयरलाइन पर रोज़ 3.8 लाख यात्री भरोसा करते हैं, वही कुछ ही घंटों में अपने इतिहास के सबसे बड़े परिचालन पतन का केंद्र बन गई।

दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे बड़े एयरपोर्ट्स पर लंबी कतारें, फंसे हुए यात्री, बढ़ता गुस्सा और फ्लाइट इंडिकेटर्स पर एक के बाद एक लाल रंग में चमकता शब्द—CANCELLED। सोशल मीडिया पर अफरातफरी, संसद में हंगामा और DGCA के कड़े निर्देशों के बीच देशभर में एक ही सवाल गूंजने लगा — आखिर इंडिगो में इतनी बड़ी गड़बड़ी हुई कैसे?

सामान्य दिनों में प्रतिदिन 2300 से अधिक उड़ानें संचालित करती है यह एयरलाइन

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो बीते कुछ दिनों से अपने इतिहास के सबसे बड़े परिचालन संकट से जूझ रही है। सामान्य दिनों में जहां यह एयरलाइन प्रतिदिन 2300 से अधिक उड़ानें संचालित करती है और लगभग 3.8 लाख यात्रियों को सेवा देती है, वहीं अचानक इसकी फ्लाइट्स का बड़े पैमाने पर रद्द होना पूरे देश में अफरा-तफरी का कारण बन गया। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद जैसे बड़े एयरपोर्ट सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। हजारों यात्री हवाई अड्डों पर फंस गए, कई जगहों पर हंगामा हुआ, और एयरलाइन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए। मामला लोकसभा तक पहुंच गया। DGCA और नागरिक उड्डयन मंत्रालय को हस्तक्षेप करना पड़ा और इंडिगो प्रबंधन को कई कड़े निर्देश दिए गए।

इंडिगो के संकट की शुरुआत अचानक नहीं हुई बल्कि इसके पीछे कई दिनों से जमा हो रही परिचालन गड़बड़ियां थीं, जिन्हें समय रहते संबोधित नहीं किया गया। नवंबर महीने में ही इंडिगो को 1,232 फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ी थीं। यह संकेत था कि अंदर कुछ ठीक नहीं चल रहा है, लेकिन उस समय इसे सामान्य परिचालन चुनौतियों से जोड़कर देखा गया। हालांकि, दिसंबर के पहले हफ्ते तक स्थिति इस कदर बिगड़ गई कि सिर्फ दो दिनों में लगभग 900 से ज्यादा उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। अकेले गुरुवार को 500 और शुक्रवार को 400 से अधिक फ्लाइट्स रद्द होने की खबर ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दीं। दिल्ली एयरपोर्ट पर स्थिति सबसे खराब रही, जहां 220 से अधिक उड़ानें कैंसिल हुईं। इसका असर दूसरी एयरलाइनों पर भी पड़ा क्योंकि इंडिगो सबसे बड़ा नेटवर्क रखती है। जब उसकी फ्लीट एक साथ प्रभावित हुई तो कई एयरपोर्ट्स पर स्लॉट, ग्राउंड सर्विस, गेट मैनेजमेंट—सब पर दबाव बढ़ा और यात्रियों का प्रवाह कई गुना बढ़ गया।

दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद और मुंबई के एयरपोर्ट पर लगीं लंबी-लंबी कतारें

स्थिति इतनी खराब थी कि दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद और मुंबई के एयरपोर्ट पर लंबी-लंबी कतारें लग गईं। कई यात्री फंस गए, उनकी कनेक्टिंग उड़ानें छूट गईं, परिवार के लोग बिखर गए, और कई लोगों की अंतरराष्ट्रीय यात्रा भी खतरे में पड़ गई। एयरलाइन की ओर से देरी से मिलने वाली जानकारी, अचानक कैंसिलेशन, अटक गई बुकिंग्स और कस्टमर केयर की अपर्याप्तता ने इन समस्याओं को और बढ़ा दिया। सोशल मीडिया पर सैकड़ों वीडियो वायरल हुए जिनमें यात्री अपनी निराशा और गुस्सा व्यक्त कर रहे थे। कुछ ने बताया कि एयरलाइन बोर्डिंग पास तक जारी कर देती है और उड़ान को समय पर दिखाती है, लेकिन प्रस्थान समय आते ही उड़ान होल्ड पर चली जाती है या रद्द कर दी जाती है। इससे एयरलाइन की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे।

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय को करना पड़ा हस्तक्षेप

परिचालन संकट इतना गंभीर था कि DGCA यानी नागरिक उड्डयन महानिदेशालय को हस्तक्षेप करना पड़ा। DGCA ने एयरलाइन से रिपोर्ट मांगी और पूछा कि इतने बड़े पैमाने पर उड़ानें क्यों रद्द हो रही हैं। इंडिगो ने जो जवाब दिया वह बहुत चौंकाने वाला था। एयरलाइन ने बताया कि 1,232 फ्लाइट्स में से 755 फ्लाइट्स सिर्फ स्टाफ की कमी के कारण रद्द हुईं। यानी आधे से अधिक कैंसिलेशन का कारण क्रू उपलब्ध न होना था। इसके अलावा 92 उड़ानें ATC फेलियर, 258 एयरपोर्ट प्रतिबंधों और 127 अन्य कारणों से रद्द हुईं। DGCA ने इसे गंभीर ‘‘प्लानिंग फेलियर’’ बताया और कहा कि एयरलाइन ने नए FDTL (Flight Duty Time Limit) नियमों के प्रभाव का गलत अनुमान लगाया। नए नियमों के अनुसार पायलटों और क्रू के ड्यूटी आवर्स बदल गए, जिससे एयरलाइन को अतिरिक्त क्रू की जरूरत पड़ी, लेकिन इंडिगो ने यह अंदाजा कम लगाया। नतीजा यह हुआ कि कई क्रू सदस्यों के ड्यूटी आवर्स पूरा हो गए और वे उड़ान संचालित नहीं कर सके, जिससे बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। DGCA ने इसे ‘‘शेड्यूल प्लानिंग में गंभीर त्रुटि’’ माना और इंडिगो को सख्त चेतावनी दी।

इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्ट का ईमेल हुआ लीक

इस बीच इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्ट का ईमेल भी लीक हो गया, जिसने स्थिति पर और रोशनी डाली। उन्होंने लिखा कि परिचालन संकट कई कारणों का परिणाम है—मामूली तकनीकी खामियां, मौसम की दिक्कतें, एविएशन सिस्टम में भीड़भाड़, शेड्यूल बदलाव और ऊपर से नई FDTL नॉर्म्स का प्रभाव। उन्होंने माना कि एयरलाइन अपने यात्रियों से किया गया वादा पूरा नहीं कर सकी और इसके लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। लेकिन यह ईमेल भी यात्रियों के गुस्से को शांत नहीं कर सका क्योंकि हालात लगातार बिगड़ते जा रहे थे और रद्द होने वाली उड़ानों की संख्या बढ़ती ही जा रही थी।

इंडिगो ने हालांकि कहा कि वह युद्धस्तर पर सुधार कार्य कर रही है। एयरलाइन ने बताया कि उसकी टीमें MOCA, DGCA, BCAS, AAI और सभी एयरपोर्ट ऑपरेटरों के साथ मिलकर समस्या को दूर करने में जुटी हैं। साथ ही, एयरलाइन ने यात्रियों से अपील की कि वे अपनी फ्लाइट स्टेटस लगातार चेक करते रहें और जरूरी दस्तावेजों के साथ समय से पहले एयरपोर्ट पहुंचे। नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने भी स्थिति की समीक्षा की और इंडिगो को यह सुनिश्चित करने को कहा कि मौजूदा संकट का फायदा उठाकर हवाई किराए में इजाफा न किया जाए। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि परिचालन तुरंत सामान्य किए जाएं और रद्द होने वाली उड़ानों की जानकारी यात्रियों को समय रहते दी जाए।

संसद तक पहुंचा मामला

स्थिति इतनी गंभीर थी कि यह मुद्दा संसद तक पहुंच गया। शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस दिया और कहा कि इंडिगो की गड़बड़ियों के कारण पूरे देश में हजारों यात्री परेशान हैं। कांग्रेस के सांसद जीएम कृष्णा ने भी सरकार से तत्काल कार्रवाई करने और यात्रियों को राहत देने की मांग की। ऐसा पहली बार हुआ जब किसी एयरलाइन के परिचालन संकट पर संसद में इतने तीखे सवाल उठे।

फ्लाइट कैंसिलेशन का असर शेयर बाजार में भी दिखा। इंडिगो की पेरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन के शेयर में लगभग 3% की गिरावट आई। निवेशकों की चिंता बढ़ गई क्योंकि यदि यह समस्या लंबी खिंचती है तो एयरलाइन की आय, संचालन, नेटवर्क और प्रतिष्ठा सब पर असर पड़ सकता है।

अगर हम यात्री अनुभवों की बात करें तो सोशल मीडिया पर हजारों शिकायतें सामने आईं। कुछ यात्रियों ने बताया कि एयरलाइन दिखाती है कि उड़ान समय पर है, लोग और सामान चेक-इन कर लेते हैं, बोर्डिंग पास जारी हो जाता है, लेकिन ठीक प्रस्थान समय पर फ्लाइट होल्ड पर चली जाती है और घंटों तक कोई अपडेट नहीं मिलता। कुछ ने बताया कि स्टाफ भी स्थिति को लेकर भ्रमित था और उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहा था। एक यात्री ने लिखा, ‘‘इंडिगो ने सारी हदें पार कर दी है। हम फंसे हुए हैं और असहाय हैं।’’ कई लोगों को रिफंड पाने में मुश्किल हुई, कई यात्रियों की होटल बुकिंग्स खराब हो गईं, कई की मेडिकल या जरूरी अपॉइंटमेंट छूट गई। कई विदेशी यात्रियों की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिंग फ्लाइट मिस हो गईं और उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ा।

परिचालन सामान्य होने में लग सकते हैं और 2–3 दिन

इस पूरे संकट के बीच DGCA ने कहा कि इंडिगो ने यह संकेत दिया है कि परिचालन सामान्य होने में 2–3 दिन और लग सकते हैं। एयरलाइन ने बताया कि सोमवार से वह उड़ानों की संख्या थोड़ी कम कर देगी ताकि सिस्टम पर दबाव कम हो और मौजूदा यात्रियों को परेशानी कम हो। DGCA ने बताया कि सुधार की प्रक्रिया चल रही है और 10 फरवरी 2026 तक ऑपरेशन पूरी तरह स्थिर हो जाएगा। यह समयसीमा दिखाती है कि एयरलाइन को संकट कितना गहरा लग रहा है। इसका मतलब है कि आने वाले हफ्तों में उड़ानों में कुछ न कुछ गड़बड़ी जारी रह सकती है।

अब सवाल उठता है कि आखिर यह संकट इतना अचानक और इतना बड़ा क्यों हुआ? इसके मुख्य कारण थे—नए FDTL नियमों को ठीक से लागू न करना, क्रू की कमी, तकनीकी खामियां, मौसम की दिक्कतें और एविएशन ग्रिड की ओवरलोडिंग। लेकिन जो सबसे बड़ा कारण सामने आया वह था ‘‘क्रू मैनेजमेंट की असफलता’’। इंडिगो के पास जितने पायलट और केबिन क्रू की जरूरत थी, वह उनकी उपलब्ध संख्या से कम थी। जब FDTL नियम लगे तो क्रू को अधिक विश्राम समय चाहिए था और उनकी उपलब्धता कम हो गई। इससे एक के बाद एक उड़ानें domino effect की तरह रद्द होती चली गईं। एक उड़ान कैंसिल होने से उसकी अगली उड़ानें भी प्रभावित हो गईं—यह अव्यवस्था चेन रिएक्शन की तरह बढ़ती चली गई।

क्रू भर्ती बढ़ाएगी इंडिगो

इंडिगो ने अब कहा है कि वह क्रू भर्ती बढ़ाएगी, शेड्यूल की योजना में सुधार करेगी और DGCA द्वारा सुझाए गए कदम उठाएगी। एयरलाइन ने माना कि उसने स्टाफ और प्रबंधन से जुड़ी समस्याओं को हल्के में लिया और इसका खामियाजा देशभर के यात्रियों को भुगतना पड़ा। अब एयरलाइन अपनी प्रतिष्ठा और संचालन को वापस पटरी पर लाने की कोशिश में लगी है।

इस पूरे घटनाक्रम में एक चीज साफ हो गई कि भारत का एविएशन सिस्टम बहुत ज्यादा तनाव में है। देश में यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है लेकिन क्रू, तकनीकी स्टाफ, इंफ्रास्ट्रक्चर और एयरलाइंस की कैपेसिटी उतनी तेजी से नहीं बढ़ रही। इंडिगो जैसे बड़े नेटवर्क पर कोई भी गड़बड़ी तुरंत पूरे देश में असर डाल देती है। यही वजह है कि DGCA अब एयरलाइंस से सख्त compliance और बेहतर planning की उम्मीद कर रहा है।

इंडिगो ने क्रू की पर्याप्त उपलब्धता, बेहतर प्लानिंग, तकनीकी redundancy का किया वादा

अंत में, यह संकट सिर्फ इंडिगो का नहीं बल्कि भारत के एविएशन सेक्टर के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि भविष्य में इस तरह की स्थिति से बचने के लिए एयरलाइन और नियामक दोनों को बड़े structural बदलाव करने होंगे। क्रू की पर्याप्त उपलब्धता, बेहतर प्लानिंग, तकनीकी redundancy, मौसम और ATC से जुड़े contingency प्लान और सबसे बढ़कर यात्रियों को सटीक व समय पर सूचना देना—ये सभी चीजें अनिवार्य हैं। इंडिगो ने वादा किया है कि वह इन सब पर काम करेगी, लेकिन यात्रियों के लिए असली राहत तब मिलेगी जब यह वादा जमीनी स्तर पर दिखेगा।

यात्री सिर्फ उड़ान नहीं खरीदते—वे विश्वास खरीदते हैं और यही विश्वास इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चोटिल हुआ है। आने वाले हफ्ते तय करेंगे कि इंडिगो इस संकट से उबरकर पहले से मजबूत होकर निकलती है या यह घटना भारतीय एविएशन पर एक और बोझ बनकर रह जाती है। DGCA की निगरानी, सरकारी दबाव और यात्रियों की बढ़ती अपेक्षाओं के बीच अब जिम्मेदारी एयरलाइन पर है कि वह अपने सिस्टम को स्थिर, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाए।

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