प्रशासन की भिक्षावृत्ति मुक्त शहर अभियान के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। वर्षों से सराफा इलाके में लकड़ी के तख्त पर बैठकर भीख मांगने वाला व्यक्ति वास्तव में “करोड़पति” निकला।
तीन घर, लग्ज़री कार, लाखों की आमदनी
प्रशासन की भिक्षावृत्ति मुक्त शहर अभियान के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। वर्षों से सराफा इलाके में लकड़ी के तख्त पर बैठकर भीख मांगने वाला व्यक्ति वास्तव में “करोड़पति” निकला।प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, उसकी सालाना आय 15 से 20 लाख रुपये के बीच बताई जा रही है।
तीन मकान, ऑटो और कार का मालिक-
जिला प्रशासन ने हाल ही में सराफा क्षेत्र से एक शारीरिक रूप से दिव्यांग भिखारी मंगीलाल को रेस्क्यू किया। जांच में सामने आया कि मंगीलाल के पासतीन मकान, जिनमें भगत सिंह नगर में तीन मंज़िला बड़ा मकान और शिवनगर में एक अन्य विशाल मकान शामिल है।दो ऑटो रिक्शा, जो किराए पर चलते हैं, एक कार, जिसके लिए उसने ₹12,000 मासिक वेतन पर ड्राइवर रखा हुआ है। भीख के साथ सूद पर पैसा देता था। अधिकारियों के अनुसार, मंगीलाल रोज़ाना हजारों रुपये भीख से कमाता था और सराफा बाजार के दुकानदारों को दैनिक और साप्ताहिक ब्याज पर पैसा उधार भी देता था।इतना ही नहीं, आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद उसे रेडक्रॉस सोसाइटी द्वारा सरकारी दिव्यांग सहायता के तहत 10×20 फीट का 1BHK मकान भी मिला हुआ था।
कलेक्टर बोले- जरूरत पड़ी तो FIR दर्ज होगी
जिला कलेक्टर शिवम वर्मा ने वीडियो कॉल पर बताया कि भिक्षावृत्ति मुक्त अभियान के तहत भीख मांगना और देना दोनों दंडनीय अपराध हैं।उन्होंने कहा कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और जरूरत पड़ने पर एफआईआर दर्ज की जाएगी।फिलहाल मंगीलाल को उज्जैन के राहत केंद्र भेजा गया है, जहां उसकी आय, संपत्ति और गतिविधियों की पुष्टि की जा रही है।
सूचना देने पर मिलेगा इनाम-
कलेक्टर ने नागरिकों से अपील की है कि वे भिक्षावृत्ति से जुड़े मामलों की सूचना दें। सत्यापित जानकारी देने पर ₹1,000 का इनाम घोषित किया गया है।मंगीलाल को लेकर सराफा क्षेत्र के नागरिकों और व्यापारियों द्वारा पहले भी कई बार शिकायतें की जा चुकी थीं।
यह अकेला मामला नहीं-
प्रशासन का कहना है कि यह कोई अकेला मामला नहीं है। पहले भी एक महिला द्वारा मात्र 45 दिनों में ₹2.5 लाख कमाने का मामला सामने आया था, जिस पर किशोर न्याय अधिनियम के तहत केस दर्ज हुआ था।
अभियान की स्थिति-
भिक्षावृत्ति मुक्त अभियान 2024 में शुरू हुआ था।
अब तक-
लगभग 6,500 भिखारियों की पहचान हुई है। 4,000 से अधिक का पुनर्वास व परामर्श किया गया। 1,500 से अधिक को उज्जैन के आश्रम भेजा गया। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामले जनता की सहानुभूति के शोषण को दर्शाते हैं और समाज के साथ धोखा हैं।
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