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न्यायमूर्ति गवई ने बुलडोजर जस्टिस को अहम बताया

न्यायमूर्ति गवई ने ‘बुलडोजर जस्टिस’ पर अपने फैसले को बताया सबसे महत्वपूर्ण

सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश बी.आर. गवई ने विदाई समारोह में कहा कि उनके कार्यकाल का सबसे महत्वपूर्ण फैसला ‘बुलडोजर जस्टिस’ के खिलाफ दिया गया निर्णय है, जिसे वे कानून के शासन की रक्षा मानते हैं।

न्यायमूर्ति गवई ने ‘बुलडोजर जस्टिस’ पर अपने फैसले को बताया सबसे महत्वपूर्ण

Justice BR Gavai Speech |

विदाई समारोह में तोड़ी परंपरा

 सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.आर. गवई ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के विदाई समारोह में अपने ‘बुलडोजर जस्टिस’ के खिलाफ दिए गए फैसले को अपने कार्यकाल का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय बताया। आमतौर पर जज अपने फैसलों पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी नहीं करते, लेकिन न्यायमूर्ति गवई ने यह परंपरा तोड़ते हुए स्पष्ट रूप से अपनी राय रखी।

रिटायरमेंट से पहले खुलकर रखी बात

जस्टिस गवई ने कहा कि वह यह बात इसलिए कह पा रहे हैं क्योंकि उनके सभी फैसले लिखे जा चुके हैं और वह 23 नवंबर 2025 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि अब उनके पास कोई न्यायिक कार्य नहीं बचा है, इसलिए वह अपने विचार खुलकर रख सकते हैं।

घर गिराना कानून के शासन के खिलाफ’

न्यायमूर्ति गवई ने कहा, “बुलडोजर से न्याय करना कानून के शासन के खिलाफ है। सिर्फ इसलिए कि किसी व्यक्ति पर अपराध का आरोप है या सजा सुनाई गई है, उसका घर कैसे गिराया जा सकता है? उसके परिवार और माता-पिता का क्या दोष? आश्रय का अधिकार एक मौलिक अधिकार है।”

विदेशों में भी उठाया था मुद्दा

उन्होंने याद दिलाया कि विदेशों में दिए गए अपने भाषणों में भी उन्होंने ‘बुलडोजर जस्टिस’ का जिक्र किया था, ताकि यह दिखाया जा सके कि भारत की न्यायपालिका किस तरह कानून के शासन की रक्षा करती है।

आरक्षण के सब-क्लासीफिकेशन पर भी बोले

जस्टिस गवई ने नौकरियों में आरक्षण के अंदर SC-ST वर्गों के सब-क्लासीफिकेशन की अनुमति देने वाले फैसले को बेहद आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि यह सोचना कठिन है कि एक मुख्य सचिव के बच्चों को उसी श्रेणी में रखा जाए जिस श्रेणी में एक कृषि मजदूर के बच्चों को रखा जाता है, जिनके पास शिक्षा और संसाधनों की पहुंच तक नहीं है।

अंबेडकर के विचारों का हवाला

उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर के अनुसार समानता का अर्थ सबके साथ समान व्यवहार करना नहीं है, क्योंकि ऐसा करने से असमानता और बढ़ सकती है।

कार्यकाल में 107 जजों की नियुक्ति

न्यायमूर्ति गवई ने बताया कि अपने छोटे से कार्यकाल में उन्होंने हाई कोर्टों में 107 जजों की नियुक्ति देखी। उन्होंने कॉलेजियम के अपने सहयोगियों को बैठकों के दौरान सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए धन्यवाद दिया।

डेढ़ घंटे चला विदाई समारोह

न्यायमूर्ति गवई का विदाई कार्यक्रम सुबह कोर्ट रूम में आयोजित हुआ, जो लगभग डेढ़ घंटे तक चला। इस दौरान सभी ने उनके योगदान और न्यायिक दृष्टिकोण की सराहना की।

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