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बैंकिंग प्रणाली पर आम जनता का बढ़ता भरोसा

बैंकिंग प्रणाली आम आदमी का भरोसा हाल के वर्षों में बढ़ा

भारत के बैंकिंग सिस्टम पर आम जनता का भरोसा हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2015 से 2025 के बीच भारतीय बैंकों की जमा राशि और कर्ज में करीब तीन गुना का इजाफा हुआ है।

बैंकिंग प्रणाली आम आदमी का भरोसा हाल के वर्षों में बढ़ा

Indian Banking System |

बैंकिंग सिस्टम पर जनता का भरोसा मजबूत

भारत के बैंकिंग सिस्टम पर आम जनता का भरोसा हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2015 से 2025 के बीच भारतीय बैंकों की जमा राशि और कर्ज में करीब तीन गुना का इजाफा हुआ है। इससे साफ संकेत मिलता है कि देश का बैंकिंग सिस्टम पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है और कर्ज देने की रफ्तार दोबारा तेज हुई है।

10 साल में जमा और कर्ज तीन गुना

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की सोमवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि देश का बैंकिंग सिस्टम पिछले 10 वर्षों में काफी मजबूत हुआ है। इस दौरान जमा और कर्ज में तीन गुना की तेजी आई है। वर्ष 2014-15 में बैंकों की जमा राशि 85.3 लाख करोड़ रुपये थी, जो 2024-25 में बढ़कर 241 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है। वहीं कर्ज 67.4 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 191 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है।

जीडीपी के मुकाबले बैंकिंग संपत्ति में बढ़ोतरी

रिपोर्ट के अनुसार, बैंकों की कुल संपत्ति देश की जीडीपी के मुकाबले बढ़कर 94 फीसदी हो गई है, जो पहले 77 फीसदी थी। इससे साफ है कि देश की वित्तीय स्थिति और बैंकिंग प्रणाली पहले से ज्यादा मजबूत हुई है।

खाताधारक नहीं, निवेशक बन रहे परिवार

एसबीआई रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के कई राज्यों में अब परिवार सिर्फ बचत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि निवेश की ओर भी बढ़ रहे हैं। गुजरात, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में बैंक जमा का एक हिस्सा तेजी से शेयर बाजार और अन्य वित्तीय बाजारों की ओर जा रहा है।

बैंकिंग सिस्टम का आकार कई गुना बढ़ा

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2004-05 में बैंकों की जमा राशि केवल 18.4 लाख करोड़ रुपये थी, जो अब 13 गुना से ज्यादा बढ़ चुकी है। वहीं कर्ज 11.5 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 16 गुना से ज्यादा हो गया है। इससे साफ है कि बैंकिंग प्रणाली का कुल आकार काफी बढ़ गया है।

कर्ज-जमा अनुपात में इजाफा

रिपोर्ट के अनुसार, कर्ज देने की रफ्तार जमा की तुलना में तेज रही है। इसी वजह से कर्ज और जमा का अनुपात 2020-21 में 69 फीसदी से बढ़कर 2024-25 में 79 फीसदी हो गया है।
सरकारी बैंक भी अब दोबारा ज्यादा कर्ज देने लगे हैं। पहले कुछ वर्षों में उनका हिस्सा घटा था, लेकिन अब स्थिति में सुधार दिख रहा है। स्टेट बैंक रिपोर्ट के मुताबिक, 2025-26 की पहली छमाही में बैंकों में नई जमा राशि 8.6 लाख करोड़ रुपये से घटकर 8.1 लाख करोड़ रुपये रह गई।
इस दौरान कर्ज बढ़कर 7.6 लाख करोड़ रुपये हो गया।

सरकारी बैंकों के मुनाफे की वजह

रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकारी बैंकों के मुनाफे में बढ़ोतरी के पीछे ब्याज से होने वाली कमाई, सरकारी बॉन्ड से लाभ और खुदरा व छोटे कारोबारियों को दिए गए कर्ज की अहम भूमिका रही है। एसबीआई के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में बैंकों की कमाई और मजबूत होने की उम्मीद है। त्योहारी सीजन में बढ़ी मांग, कर्ज वितरण में तेजी, कम कैश रिजर्व रेशियो (CRR) से मिलने वाला फायदा और असुरक्षित व एमएफआई सेगमेंट में डिफॉल्ट मामलों का धीरे-धीरे सामान्य होना बैंकों के मुनाफे को सहारा देगा।

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