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रुपये को थामने के लिए आरबीआई बढ़ा सकता है ब्याज

पेट्रोल-डीजल के बाद आम आदमी को लग सकता ब्याज दरों का झटका

बैंकों की ब्याज दरें आम आदमी को दे सकती हैं मंहगाई का झटका। अब तक ब्याज दरों को स्थिर रखने की बात करने वाला भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अगले महीने ब्याज दरों में वृद्धि कर सकता है।

पेट्रोल-डीजल के बाद आम आदमी को लग सकता ब्याज दरों का झटका

पेट्रोल-डीजल के बाद आम आदमी को लग सकता ब्याज दरों का झटका

 गिरते रुपये को थामने के लिए आरबीआई बढ़ा सकता ब्याज दरें

नई दिल्ली।
पेट्रोल - डीजल और गैस के बाद बैंकों की ब्याज दरें आम आदमी को दे सकती हैं मंहगाई का झटका। अब तक ब्याज दरों को स्थिर रखने की बात करने वाला भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अगले महीने ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी का एलान कर सकता है। इससे आम आदमी पर ईएमआई का बोझ बढ़ जाएगा और  कर्ज मंहगा हो जाएगा। 

पश्चिम एशिया में जारी तनाव की वजह से कच्चे तेल में आये उछाल और रुपये में तेज गिरावट के कारण रिजर्व बैंक इस समय मंहगाई को थामने के लिए भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है। इसे देखते हुए आरबीआई जून यानी अगले महीने से ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने की तैयारी कर रहा है। वर्तमान में आरबीआई की रेपो दर 5.25% पर स्थिर है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अगली बैठक 3 से 5 जून 2026 के बीच निर्धारित है, जिसमें ब्याज दरों के संबंध में अंतिम फैसला लिया जाएगा।

देश के शीर्ष अर्थशास्त्रियों और विश्लेषकों का अनुमान है कि पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव, तेल (कच्चे तेल) की कीमतों में उछाल और कमोडिटी की कीमतों के दबाव के कारण खुदरा और थोक महंगाई दर में वृद्धि का अनुमान है। डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा (रुपये) में भारी गिरावट देखी गई है, जिसे थामने के लिए ब्याज दरें बढ़ाना एक विकल्प माना जा रहा है। ऐसे में रुपये की रिकॉर्ड गिरावट और बढ़ती महंगाई के दबाव के कारण भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आगामी जून की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।

रिजर्व बैंक की तरफ से इस बारे में फिलहाल कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गयी है। कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि आरबीआई सीधे तौर पर दरों में भारी वृद्धि करने के बजाय रुपये को स्थिर करने के लिए अन्य मौद्रिक उपाय, जैसे विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल या डॉलर  जुटाना, को भी अपना सकता है। आरबीआई विदेश में रह रहे अनिवासी भारतीयों से विदेशी मुद्रा भेजने के लिए भी अनुरोध कर सकता है।

एक आकलन के अनुसार रिजर्व बैंक हाल के दिनों में रुपये की गिरावट रोकने के लिए हर रोज करीब 1 बिलियन डॉलर की बाज़ार में बिक्री की है। रॉयटर्स के मुताबिक़ इसका कुछ फ़ायदा भी हुआ है। डॉलर रुपये के मुक़ाबले कल गिरकर ₹96.20 पर बंद हुआ। पर ये उपाय लंबे समय तक नहीं काम कर सकता।

"स्टैंडर्ड चार्टर्ड" के अर्थशास्त्रियों ने बृहस्पतिवार को नोट में कहा, ईरान संकट के कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई पर बढ़ते जोखिम को देखते हुए आरबीआई जून से ही ब्याज दरें बढ़ाना शुरू कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसके बाद अगस्त में भी एक बढ़ोतरी होगी। अर्थशास्त्री अनुभूति सहाय और सौरभ आनंद ने कहा, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और अन्य एशियाई केंद्रीय बैंकों के ब्याज दरें बढ़ाने से आरबीआई पर भी दबाव बढ़ रहा है।

दोनों अर्थशास्त्रियों ने कहा, मौजूदा हालात को देखते हुए आरबीआई रेपो दर में 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकता है, जिसे जून और अगस्त के बीच बराबर बांटा जाएगा। हालांकि, अगर 3 जून से होने वाली आरबीआई की तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में रेपो दर में वृद्धि नहीं हुई, तो अगस्त में एक साथ 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी की जा सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो आपके कार, होम और पर्सनल लोन की मासिक किस्त (ईएमआई) बढ़ जाएगी।

अर्थशास्त्रियों ने नोट में आगे कहा, अगर कमोडिटी की कीमतों पर लगातार दबाव और कमजोर रुपये की वजह से महंगाई उम्मीद से ज्यादा बढ़ती है, तो आरबीआई मार्च के आखिर तक रेपो दर में 25 से 50 आधार अंकों की और बढ़ोतरी कर सकता है।

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