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जवाहरलाल कृषि विवि में शोध तेज

जबलपुर के जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय में अनुसंधान...

जबलपुर। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञानियों ने धान की ऐसी नई किस्में विकसित की हैं, जो किसानों के लिए वरदान साबित होंगी।

 जबलपुर के जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय में अनुसंधान

Jawaharlal Nehru Krishi Vishwavidyalaya |

जबलपुर। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञानियों ने धान की ऐसी नई किस्में विकसित की हैं, जो किसानों के लिए वरदान साबित होंगी। दरअसल वर्तमान में बदलते मौसम, पानी की कमी और बढ़ती लागत के बीच ये नई किस्में खेती को आसान, किफायती और टिकाऊ बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही हैं। विश्वविद्यालय द्वारा विकसित की गई करीब 15 नई किस्मों का अब राष्ट्रीय स्तर के लिए परीक्षण किया जाएगा।

कम ऊंचाई की फसल, बेहतर उत्पादन देती है

इन किस्मों की खास बात यह है कि ये पारंपरिक धान की तुलना में कम ऊंचाई की हैं, कम पानी में बेहतर उत्पादन देती हैं। इनमें से अनेक किस्में ऐसी हैं, जिनमें रोपाई की जरूरत नहीं पड़ेगी। यानी किसान सीधे खेत में बुआई कर धान की फसल ले सकेंगे। इससे न केवल श्रम और समय की बचत होगी, बल्कि खेती की कुल लागत में भी कमी आएगी।

इन जिलों में होगा परीक्षण

धान की इन नई किस्मों का परीक्षण प्रदेश के सात जिलों (जबलपुर, कटनी, उमरिया, डिंडौरी, अनूपपुर, शहडोल और बालाघाट) में किया जाएगा। इसके लिए करीब 500 किसानों का चयन किया गया है, जिनके खेतों में विश्वविद्यालय के विज्ञानियों की देखरेख में इन बीजों की खेती कराई जाएगी। खास बात यह है कि फसल लगाने से लेकर उत्पादन और लागत तक का पूरा दायित्व कृषि विश्वविद्यालय के बीज उत्पादन विशेषज्ञ उठाएंगे, जिससे किसानों को किसी प्रकार का आर्थिक जोखिम नहीं उठाना पड़ेगा।

मौसम और तापमान का असर कम

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के डायरेक्टर रिसर्च प्रो. जीएस कोतु बताते हैं कि धान की इन किस्मों पर मौसम और तापमान का असर भी अपेक्षाकृत कम होता है। यह विशेषता जलवायु परिवर्तन के दौर में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां अनियमित बरसात और तापमान में उतार-चढ़ाव किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं।

बदलेगी खेती की तस्वीर

करीब एक वर्ष तक चलने वाले इस परीक्षण के दौरान उत्पादन क्षमता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और लागत-लाभ का गहन अध्ययन किया जाएगा। यदि परीक्षण सफल रहता है, तो इन किस्मों को राष्ट्रीय स्तर पर किसानों के लिए अनुशंसित किया जाएगा। कम पानी, कम मेहनत और कम लागत में बेहतर उत्पादन देने वाली ये नई धान की किस्में भविष्य में खेती की तस्वीर बदल सकती हैं।

किसानों के लिए वरदान

इस पहल से किसानों की आय बढ़ाने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञानियों द्वारा तैयार की गई नई किस्में किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती हैं।

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