चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा लेने के लिए उत्तर प्रदेश के पूर्व आईपीएस एन के मिश्र को स्पेशल आबजर्बर के तौर पर नियुक्त किया है।
कोलकाता। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा लेने के लिए उत्तर प्रदेश के पूर्व आईपीएस एन के मिश्र को स्पेशल आबजर्बर के तौर पर नियुक्त किया है। चुनाव आयोग की दस सदस्यीय टीम एक और दो मार्च को कोलकाता आएंगी और पश्चिम बंगाल की चुनाव संबंधित स्थिति का पता करेगी। चुनाव आयोग ने राज्य के सभी जिला चुनाव अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया है कि फाइनल वोटर लिस्ट में किसी वोटर के फर्जी या विदेशी पाए जाने पर उसके लिए जिला चुनाव अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
एसआईआर में छह लाख गैरहाजिर
राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के सुत्रों के मुताबिक एसआईआर के तहत पूरी हो चुकी सुनवाई में गैरहाजिर रहने वाले वोटरों की संखया करीब छह लाख है। ऐसे तार्किक विसंगति (लाजिकल डिसक्रिपेंसी) और अमिलान (य्नममैप्ड) के वोटरों की संख्य करीब दस फीसदी होगी जिनके नाम फाइनल वोटर लिस्ट से हट सकते हैं। लाजिकल जिसक्रिपेंसी के तहत एक करोड़ तीस लाख वोटर थे जिनकी सुनावाई हुई।
एसआईआर में लाखों नाम हटे, कई गैरहाजिर
मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक एसआईआर के तहत वोटरों की सुनवाई में गैरहाजिर होने वाले सबसे अधिर करीब एक लाख 38 हजार वोटर उत्तर चौबीस परगना के थे। दक्षिण चौबीस परगना में 46 हजार, दक्षिण कोलकाता में 22 हजार, उत्तर कोलकाता में दो हजार और कालिपोंग में 440 वोटर सुनवाई में गैरहाजिर हुए। गौरतलब है कि एसआईआर के पहले चरण में वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट से हटाए गए वोटरों की संख्या 58 लाख 20 हजार से कुछ ज्यादा है। उनमें से 24 लाख मृत वोटर है। अपना स्थान बदलने वाले 19 लाख 88 हजार वोटर है। 12 लाख 20 हजार वोटरों का लापता है। अनुमान है कि 80 लाख से वोटरों का नाम फाइनल लिस्ट से हट सकता है।
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