S Jaishankar : एस जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि किसी भी सार्थक सुधार को उसकी अपनी प्रक्रिया के जरिये ही रोका जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र को बनाए रखना तथा इसके पुनर्निर्माण की मांग करना स्पष्ट रूप से..
S Jaishankar : एस जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि किसी भी सार्थक सुधार को उसकी अपनी प्रक्रिया के जरिये ही रोका जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र को बनाए रखना तथा इसके पुनर्निर्माण की मांग करना स्पष्ट रूप से विश्व के समक्ष एक बड़ी चुनौती है. वे आतंकवाद को लेकर UN की प्रतिक्रिया पर बोले हैं.
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद के प्रति संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया से ज्यादा, कुछ उदाहरण संयुक्त राष्ट्र के सामने मौजूद चुनौतियों को दर्शाते हैं, जब सुरक्षा परिषद का एक वर्तमान सदस्य उसी संगठन का खुलेआम बचाव करता है, जिसने पहलगाम जैसे बर्बर आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी ली है तो इससे बहुपक्षवाद की विश्वसनीयता पर क्या असर पड़ता है?
एस जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद के पीड़ितों और अपराधियों को एक ही श्रेणी में रखना दुनिया को और अधिक निंदनीय बना देता है, जब आतंकवादी कहने वालों को प्रतिबंधों से बचाया जाता है तो इसमें शामिल लोगों की ईमानदारी पर सवाल उठता है. यदि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना केवल दिखावटी बात हो गई है तो विकास और सामाजिक-आर्थिक प्रगति की स्थिति और भी गंभीर है.
आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता हो या राजनीतिक वर्चस्व
उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) एजेंडा 2030 की धीमी गति ग्लोबल साउथ के संकट को मापने का एक महत्वपूर्ण पैमाना है. इसके अलावा भी कई अन्य पैमाने हैं, चाहे वह व्यापार उपाय हों, आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता हो या राजनीतिक वर्चस्व हो. फिर भी ऐसी उल्लेखनीय वर्षगांठ पर हम उम्मीद नहीं छोड़ सकते.
एस जयशंकर ने कहा कि चाहे कितनी भी मुश्किल क्यों न हो? बहुपक्षवाद के प्रति प्रतिबद्धता मजबूत बनी रहनी चाहिए. चाहे इसमें कितनी भी खामियां क्यों न हों, संकट के इस समय में संयुक्त राष्ट्र का समर्थन किया जाना चाहिए. एसडीजी सभी के लिए बेहतर और अधिक टिकाऊ भविष्य प्राप्त करने के लिए निर्धारित लक्ष्यों का एक समूह है.
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