PM Modi : पीएम मोदी ने रविवार को कहा कि त्याग और सेवा की भावना और अनुशासन की शिक्षा, संघ की सच्ची शक्ति है. आरएसएस सौ वर्षों से अथक और अविचल रूप से राष्ट्र सेवा में लगा हुआ है.
'त्याग, सेवा की भावना और अनुशासन..', मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने की संघ की तारीफ |
PM Modi : पीएम मोदी ने रविवार को कहा कि त्याग और सेवा की भावना और अनुशासन की शिक्षा, संघ की सच्ची शक्ति है. आरएसएस सौ वर्षों से अथक और अविचल रूप से राष्ट्र सेवा में लगा हुआ है. वे मन की बात कार्यक्रम में बोल रहे थे.
पीएम मोदी ने कहा कि अगले महीने, 7 अक्टूबर को महर्षि वाल्मीकि जयंती है. यह वास्तव में महर्षि वाल्मीकि ही थे, जिन्होंने हमें भगवान राम की अवतार कथाओं से व्यापक रूप से परिचित कराया. उन्होंने मानवता को रामायण का अद्भुत महाकाव्य दिया. रामायण भगवान राम के आदर्शों और मूल्यों से प्रभावित है. भगवान राम ने सेवा, सद्भाव और करुणा के साथ सभी को गले लगाया.
उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की रामायण के राम केवल माता शबरी और निषादराज के साथ पूरे होते हैं, जब अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हुआ, तो उसके साथ निषादराज और महर्षि वाल्मीकि को समर्पित एक मंदिर भी बनाया गया. मैं आपसे आग्रह करता हूं कि जब आप राम लला के दर्शन के लिए अयोध्या आएं, तो महर्षि वाल्मीकि और निषादराज के मंदिरों के दर्शन भी करें.
पीएम मोदी ने कहा कि त्याग और सेवा की भावना और अनुशासन की शिक्षा, संघ की सच्ची शक्ति है. आज आरएसएस सौ वर्षों से अथक और अविचल रूप से राष्ट्र सेवा में लगा हुआ है, इसीलिए हम देखते हैं कि जब भी देश में कहीं भी प्राकृतिक आपदा आती है तो आरएसएस के स्वयंसेवक सबसे पहले वहां पहुंचते हैं. ‘राष्ट्र प्रथम’ की यह भावना लाखों स्वयंसेवकों के जीवन के प्रत्येक काम और प्रत्येक प्रयास में सदैव सर्वोपरि रहती है.
‘राष्ट्र प्रथम’ की यह भावना
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि त्याग और सेवा की भावना और अनुशासन की शिक्षा, संघ की सच्ची शक्ति है. आज, आरएसएस सौ वर्षों से अथक और अविचल रूप से राष्ट्र सेवा में लगा हुआ है. इसीलिए हम देखते हैं कि जब भी देश में कहीं भी प्राकृतिक आपदा आती है, तो आरएसएस के स्वयंसेवक सबसे पहले वहां पहुंचते हैं. ‘राष्ट्र प्रथम’ की यह भावना लाखों स्वयंसेवकों के जीवन के प्रत्येक काम और प्रत्येक प्रयास में सदैव सर्वोपरि रहती है.
पीएम मोदी ने कहा कि साल 1925 में विजयादशमी के मौके पर संघ की स्थापना की गई थी. डॉ साहब के जाने के बाद गुरु जी गोलवलकर ने राष्ट्र सेवा के इस महायज्ञ को आगे बढ़ाया.
उन्होंने कहा कि 100 साल पहले, जब आरएसएस की स्थापना हुई थी. तब देश सदियों से गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था. सदियों से चली आ रही इस गुलामी ने हमारे स्वाभिमान और आत्मविश्वास को गहरी चोट पहुंचाई थी. दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यता पहचान के संकट से जूझ रही थी. हमारे नागरिक हीन भावना का शिकार हो रहे थे.
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