Amit Shah : गृह मंत्री ने रविवार को कहा कि जब तक भारतीय समाज नक्सलवाद की विचारधारा को पोषित करने वाले लोगों को नहीं पहचानता और उन्हें मुख्यधारा में वापस नहीं लाता. यह लड़ाई अधूरी रहेगी.
देश 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा... अमित शाह का बयान |
Amit Shah : गृह मंत्री ने रविवार को कहा कि जब तक भारतीय समाज नक्सलवाद की विचारधारा को पोषित करने वाले लोगों को नहीं पहचानता और उन्हें मुख्यधारा में वापस नहीं लाता. यह लड़ाई अधूरी रहेगी. वे नक्सल मुक्त भारत, मोदी के नेतृत्व में रेड टेरर का अंत कार्यक्रम के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे.
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जब मोदी जी ने भारत के प्रधानमंत्री का पद संभाला, तब देश के सामने तीन बड़े आंतरिक सुरक्षा संकट थे. जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित इलाका.
उन्होंने कहा कि ये क्षेत्र करीब चार-पांच दशकों से अशांति के केंद्र रहे, जहां हजारों लोगों की जान गई और शांति-स्थिरता लगातार बाधित होती रही. इतना ही नहीं, देश के बजट का बड़ा हिस्सा, जो गरीबों के कल्याण पर खर्च हो सकता था, इन चुनौतियों को सुलझाने में लगाना पड़ा. मोदी जी के पद संभालने के बाद सरकार ने इन तीनों क्षेत्रों को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता माना और लंबे समय के लिए एक ठोस और स्पष्ट रणनीति बनाई, ताकि इन समस्याओं का समाधान निकाला जा सके.
इस देश में नक्सलवाद की समस्या क्यों पनपी?
अमित शाह ने कहा कि मैंने पहले भी कहा है और दोहराता हूं कि 31 मार्च 2026 तक देश नक्सलवाद से मुक्त होगा, लेकिन हमें यह भी समझना होगा कि आखिर इस देश में नक्सलवाद की समस्या क्यों पनपी? क्यों बढ़ी? और क्यों विकसित हुई. इसका वैचारिक पोषण किसने किया.
बीजेपी की पोस्ट में लिखा गया कि मोदी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के कारण नक्सली हिंसा में भारी कमी आई है और उग्रवाद जल्द ही इतिहास के पन्नों में सिमट जाएगा.
यह भी पढ़ें : https://www.primenewsnetwork.in/india/india-won-the-toss-bowling-decision/48481