उत्तर प्रदेश के सभी गांवों की जमीनों के नक्शे ऑनलाइन किये जाएंगे। सैटेलाइट तकनीक की मदद से खेत और घर होंगे ऑनलाइन मैप में टैग।
मैप की मदद से किसी भी घर या खेत तक पहुंचना होगा आसान
उत्तर प्रदेश के सभी गांवों की जमीनों के नक्शे ऑनलाइन किये जाएंगे। सैटेलाइट तकनीक की मदद से खेत और घर होंगे ऑनलाइन मैप में टैग। अब गाटा नंबर डालते ही पहुंचे सीधे खेत, घर तक की सारी चौहद्दी होगी आनलाइन। इससे लेखपालों की मनमानी पर लगाम लगेगी और सीमा विवाद समाप्त होंगे।
राजस्व परिषद ने शुरू किया काम
उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने इस योजना पर काम शुरू कर दिया है। राजस्व परिषद के अध्यक्ष अनिल कुमार ने यह जानकारी दी। राजस्व विभाग के मुताबिक प्रदेश में कुल 57694 ग्राम पंचायतें हैं जबकि राज्य में राजस्व गांवों की संख्या एक लाख से ज्यादा है।
सैटेलाइट से तैयार होगा हर खेत-घर का नक्शा
परिषद के अध्यक्ष अनिल कुमार ने बताया कि अब इन गांवों के डिजिटलीकरण कार्य शुरू कर दिया गया है। अब तक गांवों के नक्शे सिर्फ लेखपालों के पास रहते थे। लेकिन अब सेटेलाइट के जरिये एक-एक खेत और घर का नक्शा तैयार करने का काम होगा। ऑनलाइन नक्शे में हर गाटा संख्या और घर को टैग किया जाएगा। काम पूरा हो जाने के बाद हर गाटा का रकबा भी मैप पर दिखाई देगा। इससे नंबर पता होने पर मैप लगाकर किसी भी घर या खेत तक पहुंचा जा सकेगा।
30 सेमी तक की एक्युरेसी, सीमा विवाद होंगे खत्म
राजस्व विभाग के शुरुआती ट्रायल में 15-30 सेंटीमीटर तक की शुद्धता (एक्युरेसी) देखी गई है। गांवों के नक्शे ऑनलाइन होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में सीमा के विवाद खत्म होंगे।
सीमा विवाद पर लगेगी रोक
मालूम हो कि विकास कार्य का मामला हो या कोई बड़ी वारदात, पुलिस व राजस्व विभाग में अक्सर ही दो गांवों की सीमा को लेकर विवाद खड़ा हो जाता है।
सेटेलाइट इमेज के जरिए नक्शे ऑनलाइन होने के बाद इन विवादों की गुंजाइश ही नहीं रह जाएगी। हर घर और खेत (गाटा संख्या) का रकबा भी इस मैप पर प्रदर्शित होगा।
देश में सबसे बड़े पैमाने पर लागू करेगा यूपी
कर्नाटक में आंशिक तौर पर इस सुविधा का इस्तेमाल किया जा रहा है। देश में बड़े पैमाने पर इस सुविधा का इस्तेमाल करने वाला यूपी पहला राज्य होगा।
आम जनता के लिए ऐप भी बनेगा
राजस्व परिषद के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, आम लोगों के लिए एक एप भी विकसित किया जाएगा, जिसके माध्यम से वे इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकेंगे। राजस्व परिषद के अध्यक्ष अनिल कुमार ने बताया कि अगले तीन-चार माह में हम इस ऑनलाइन प्रक्रिया को पूरा कर लेंगे।
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