अमेरिका द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने की छूट एक महीने के लिए बढ़ाये जाने के बाद नये विकल्प तलाश रहे भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कुछ मोहलत और मिल गयी है।
नई दिल्ली। अमेरिका द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने की छूट एक महीने के लिए बढ़ाये जाने के बाद नये विकल्प तलाश रहे भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कुछ मोहलत और मिल गयी है। देश में गहराते ऊर्जा संकट के बीच भारत इस मोहलत का उपयोग करते हुए रूस से रियायती दरों पर कच्चे तेल की खरीद जारी रख सकता है। आंकड़ों के अनुसार, भारत ने मई महीने में रिकॉर्ड 2.3 मिलियन बैरल प्रति दिन तक रूसी तेल का आयात किया है।
ईरान संकट से बढ़ा वैश्विक ऊर्जा दबाव
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बने तनावपूर्ण माहौल और होर्मुज स्ट्रेट में जारी नाकेबंदी के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा का गंभीर संकट पैदा हो गया है। ऐसे में दुनियाभर में तेल की ऊंची कीमतों से निपटने के लिए अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने की मंजूरी एक महीने और बढ़ा दी है। इस अस्थाई राहत से भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है।
अमेरिका ने समुद्र में फंसे तेल को दी मंजूरी
अमेरिका के वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, यह अनुमति उन रूसी पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू होगी, जो इस समय जहाजों पर लादे जा चुके हैं। अमेरिकी वित्त विभाग ने जहाजों पर लदे तेल की खरीद की अनुमति 16 मई तक के लिए बढ़ा दी है। अमेरिका के इस कदम से भारत सहित अन्य देशों को समुद्र में फंसे रूसी तेल खरीदने की अनुमति मिलेगी, लेकिन इसके लिए ऊंची कीमत चुकानी होगी।
भारत नए ऊर्जा विकल्पों की तलाश में
वैश्विक स्तर पर तेल के संकट को देखते हुए भारत का मानना है कि रूसी तेल की खरीद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की मांग का दबाव कम हो सकता है। इससे दुनिया भर के देशों को बड़ी राहत मिल सकती है। अमेरिकी छूट बढ़ने से भारत को अपनी रिफाइनरियों के लिए निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने और वैश्विक स्तर पर नए विकल्पों (जैसे सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात) की तलाश करने के लिए पर्याप्त समय मिल गया है।
ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का स्पष्ट रुख
हालांकि, भारतीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि अमेरिकी प्रतिबंधों या छूट में मिलने वाली रियायतों से इतर, भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और वाणिज्यिक हितों को प्राथमिकता देना जारी रखेगा। अमेरिकी ट्रेजरी की इस अस्थायी छूट के कारण भारत में रूस से आ रहे तेल की आपूर्ति में कोई अचानक रुकावट नहीं आएगी, जिससे घरेलू बाजार में ऊर्जा की कीमतों और मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी।
रूसी तेल से सप्लाई जोखिम में मिलेगी राहत
भारत को उम्मीद है कि जो अतिरिक्त रूसी तेल बाजार में उपलब्ध होगा, उसे खरीदा जा सकता है। इससे भारत और बाकी देशों को थोड़ी राहत मिल सकती है और अल्पकालिक आपूर्ति का जोखिम कम होगा। रूस भारत के लिए सस्ते तेल का एक प्रमुख स्रोत बना हुआ है। यह छूट जब तक जारी रहेगी, तब तक रिफाइनरियां कम कानूनी जोखिमों के साथ मौजूदा व्यापार प्रवाह को बनाए रख सकेंगी।
समुद्र में मौजूद है करोड़ों बैरल रूसी तेल
सीबीएस न्यूज के मुताबिक, वर्तमान में दुनियाभर के समुद्रों में करीब 12.4 करोड़ बैरल रूसी तेल मौजूद है। रूसी तेल से आपूर्ति जरूर बढ़ेगी, लेकिन कीमतों पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। समुद्रों में रूस का 12 करोड़ बैरल तेल मौजूद है, लेकिन यह तेल की महज एक दिन की वैश्विक मांग (10.4 करोड़ प्रतिदिन) से कम है।
विशेषज्ञ बोले- संकट का स्थायी हल जरूरी
डच बैंक आईएनजी में कमोडिटीज स्ट्रेटेजी के हेड वारेन पैटरसन ने कहा, अमेरिका के इस कदम से आपूर्ति में रुकावट की पूरी भरपाई नहीं हो सकती। तेल बाजार के लिए सिर्फ एक ही समाधान है, होर्मुज से आपूर्ति फिर से सुचारू रूप से शुरू हो। अमेरिका की इस नयी छूट से उपलब्ध रूसी तेल को खरीदने की सर्वाधिक लाभ भारत और अन्य एशियाई देशों द्वारा उठाये जाने की संभावना है।
रूसी तेल सस्ता मिलने की उम्मीद कम
रूस से कच्चा तेल की आपूर्ति शुरू होने से भारत को सस्ता तेल मिलने की बहुत उम्मीद नहीं की जा सकती। ईरान संकट शुरू होने के बाद रूसी तेल और ब्रेंट क्रूड के बीच कीमतों का अंतर अब काफी कम रह गया है। मंगलवार को रूसी उराल 101-102 डॉलर और ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। युद्ध से पहले फरवरी में रूसी उराल 55 डॉलर और ब्रेंट क्रूड का भाव 70 डॉलर के आसपास था।
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