छत्तीसगढ़ के बीजापुर ज़िले में 31 मार्च मंगलवार को 12 महिला सहित 25 माओवादियों ने सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
बीजापुर (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के बीजापुर ज़िले में 31 मार्च मंगलवार को 12 महिला सहित 25 माओवादियों ने सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। अधिकारियों ने उनके कब्ज़े से 7 किलो सोना, 2.92 करोड़ रुपये नकद और 93 हथियार बरामद किए हैं। बस्तर के इंस्पेक्टर जनरल (IG) पी. सुंदरराज ने इस घटनाक्रम को नक्सल विरोधी अभियानों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि चल रहे प्रयासों के तहत बस्तर संभाग में नक्सली गतिविधियां लगभग पूरी तरह से खत्म हो गई हैं।
आईजी सुंदरराज ने नक्सल विरोधी अभियान को बताया मील का पत्थर
आत्मसमर्पण पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा, "कुल 25 माओवादी कैडरों ने जिनमें 12 महिलाएं भी शामिल हैं, हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया है। उनके द्वारा दी गई जानकारी और हमारी पहले की खुफिया जानकारी के आधार पर माओवादियों के कब्ज़े से 7 किलो सोना, 2.92 करोड़ रुपये नकद और 93 हथियार बरामद किए गए हैं। हम इस दिन को पूरे नक्सलवाद विरोधी अभियान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मान रहे हैं।"
बाकी बचे कैडरों से मुख्यधारा में लौटने की अपील
सुंदरराज ने इस घटनाक्रम को "मिशन 2026" में एक अहम कदम बताया और कहा कि अधिकारियों को उम्मीद है कि बाकी बचे कैडर भी इसी राह पर चलेंगे और मुख्यधारा में शामिल हो जाएंगे। उन्होंने उन सुरक्षा कर्मियों, जन प्रतिनिधियों और स्थानीय निवासियों को भी श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने बस्तर क्षेत्र में शांति बहाल करने में योगदान दिया है।
16 लाख की इनामी महिला नक्सलियों का सरेंडर
इसी क्रम में, सुकमा ज़िले को भी माओवादी प्रभाव से पूरी तरह मुक्त घोषित कर दिया गया है। सुकमा के पुलिस अधीक्षक (SP) किरण जी चव्हाण ने मंगलवार को बताया कि दो महिला नक्सलियों के आत्मसमर्पण और पुनर्वास के बाद यह घोषणा की गई है। SP चव्हाण ने बताया कि ये दोनों महिलाएं नक्सली संगठन की कंपनी नंबर 8 की सदस्य थीं और इन दोनों पर कुल मिलाकर 16 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
सुकमा एसपी ने दी हथियार और नकदी बरामदगी की जानकारी
उन्होंने आगे कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान हथियार और नकदी बरामद की गई।"उनके पास से 6 ऑटोमैटिक हथियार बरामद किए गए। इनमें एक INSAS LMG, दो AK-47 और तीन अन्य बंदूकें शामिल थीं। साथ ही लगभग 10 लाख रुपये की नकदी भी मिली।" उन्होंने बताया कि सरेंडर के बाद सुकमा ज़िले को माओवादी प्रभाव से पूरी तरह मुक्त घोषित कर दिया गया है।
दो सालों में 800 नक्सलियों ने किया सरेंडर
इस घटनाक्रम के बारे में बताते हुए SP ने कहा कि पिछले दो सालों में सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए गए अभियानों और अंदरूनी इलाकों में कैंप स्थापित करने की वजह से यह नतीजा सामने आया है। एसपी चव्हाण ने आगे कहा, "600 से ज़्यादा नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है और लगभग 800 अन्य नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया है। सरेंडर करने वाले नक्सलियों का पुनर्वास किया गया है।"
विकास और सुरक्षा में बड़ा सुधार
चव्हाण ने इस क्षेत्र में सुरक्षा और विकास में हुए सुधार पर भी ज़ोर दिया और कहा कि अंदरूनी इलाके अब ज़्यादा सुलभ हो गए हैं और विकास कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि बस्तर से नक्सलवाद लगभग पूरी तरह खत्म हो चुका है और यह क्षेत्र अब प्रगति के पथ पर अग्रसर है।
अमित शाह बोले- बस्तर में नक्सलवाद लगभग खत्म
देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त कराने के प्रयासों पर लोकसभा में हुई बहस का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा, "आज, बस्तर से नक्सलवाद लगभग पूरी तरह खत्म हो चुका है। बस्तर के हर एक गाँव में स्कूल स्थापित करने के लिए एक अभियान चलाया गया। इस क्षेत्र के हर गाँव में राशन की दुकान खोलने के लिए एक मुहिम शुरू की गई। हर तहसील और पंचायत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) स्थापित किए गए हैं। लोगों को आधार कार्ड और राशन कार्ड जारी किए गए हैं और अब उन्हें पाँच किलोग्राम अनाज मिल रहा है।"
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