उत्तर प्रदेश में कृषि विभाग द्वारा चलाये गये गहन अभियान के बावजूद लगभग 81.95 लाख किसानों ने अभी तक फार्मर रजिस्ट्री नहीं कराई है।
लखनऊ (यूपी)। उत्तर प्रदेश में कृषि विभाग द्वारा चलाये गये गहन अभियान के बावजूद लगभग 81.95 लाख किसानों ने अभी तक फार्मर रजिस्ट्री नहीं कराई है। ऐसे में बड़ी संख्या में किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेंहूं की खरीद समेत राज्य सरकार की अन्य योजनाओं के लाभ से वंचित हो सकते हैं।
सरकार ने फार्मर आईडी को बनाया अनिवार्य
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने किसान पहचान पत्र (फार्मर आईडी) को सभी कृषि व सहयोगी विभागों की लाभार्थी योजनाओं के लिए अनिवार्य कर दिया है। मुख्य सचिव एसपी गोयल की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि भविष्य में पीएम किसान सम्मान निधि की किस्तें भी सिर्फ उन्हीं किसानों को मिलेंगी, जिनकी फार्मर आईडी बनी होगी। साथ ही उर्वरक, बीज, कीटनाशक वितरण और लाभार्थी चयन में इसे अनिवार्य किया गया है। एमएसपी पर गेहूं, दलहन, सरसों आदि की बिक्री के लिए यह आईडी जरूरी होगा। राज्य के कृषि विभाग ने अभियान चलाकर किसानों को अधिक से अधिक संख्या में किसान पहचान रजिस्ट्री (फार्मर रजिस्ट्री) कराने को प्रेरित किया था। लेकिन इसके बावजूद राज्य के लगभग 81.95 लाख किसानों ने अभी तक फार्मर रजिस्ट्री नहीं कराई है। ऐसे में ये किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं नहीं बेच पाएंगे। साथ ही उन्हें किसान सम्मान निधि के साथ मत्स्य व पशुपालन समेत विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाएगा।
लाखों किसान अब भी रजिस्ट्री से बाहर
कृषि विभाग द्वारा प्राप्त आंकड़ों के अनुसार लखनऊ जिले के भी 72,128 किसानों की रजिस्ट्री नहीं हुई है। बता दें कि प्रदेश के कुल 75 जिलों में 2,88,70,495 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री होनी है, जिनमें से सिर्फ 2,06,75,387 किसानों की ही रजिस्ट्री हो सकी है। यह आकड़ा लगभग 80.32 फीसदी बैठता है। इस प्रकार प्रदेश में लगभग 82 लाख किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं हुई है। नतीजतन शेष किसानों के सामने एमएसपी पर गेहूं बेचने का संकट खड़ा हो गया है।
रामपुर अव्वल, सुल्तानपुर सबसे पीछे
यूपी का रामपुर जनपद फार्मर रजिस्ट्री में अव्वल रहा है जबकि सुल्तानपुर एकदम फिसड्डी साबित हुआ है। रामपुर जिले में 3,07,005 में से 2,53,909 किसान रजिस्ट्री करा चुके हैं। यह लक्ष्य का 99.58 फीसदी है। इसके बाद मुजफ्फरनगर में 97.73, गाजियाबाद में 94.72, एटा में 93.28 और कासगंज में 92.67 फीसदी किसान रजिस्ट्री करा क्रमशः प्रदेश में दूसरे, तीसरे, चौथे व पांचवें स्थान पर हैं। लखनऊ 61 वें स्थान पर है। यहां 2,46,043 में से 1,73,915 किसान ही रजिस्ट्री कराए हैं। यह लक्ष्य का 74.83 फीसदी है। वहीं, सुल्तानपुर के किसान 65.70 फीसदी के साथ फिसड्डी है। फार्मर आईडी में पिछड़े अन्य जिलों में कानपुर देहात, देवरिया, गोरखपुर और कौशाम्बी शामिल है। इन जिलों में 65 से 70 प्रतिशत किसानों ने ही रजिस्ट्री कराई है।
15 अप्रैल तक चल रहा विशेष अभियान
राज्य के संयुक्त निदेशक (कृषि) एवं नोडल ऑफिसर, डिजिटल एग्रीकल्चर, अनिल कुमार सागर ने बताया कि कृषि व विभिन्न विभागों के कर्मचारी 15 अप्रैल तक फार्मर रजिस्ट्री के लिए कराने के लिए विशेष अभियान चला रहे हैं। जिन किसानों ने अभी तक नहीं नहीं कराया है, वह यथाशीघ्र करा लें। अन्यथा कृषि संबंधी विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाएगा।
इन दस्तावेजों से आसान है रजिस्ट्री प्रक्रिया
उन्होंने बताया कि किसान आधार कार्ड, खतौनी की प्रति और आधार से लिंक मोबाइल फोन नंबर के साथ जनसेवा केंद्र, कृषि विभाग के कर्मचारी या लेखपाल से संपर्क कर रजिस्ट्री करा सकते हैं। किसान खुद भी अधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकता है। इसके लिए किसानों को अपने सभी खेतों, गाटा और खतौनियों को रजिस्ट्री से जोड़ना होगा।
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