प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

हाईकोर्ट ने बहाली का दिया आदेश

हाईकोर्ट ने 20 साल की सेवा के बाद बर्खास्त शिक्षकों को किया बहाल

उत्तर प्रदेश में लंबी सेवा के बाद सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने के सरकार के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुचित बताया है। कोर्ट ने बर्खास्त शिक्षकों की बहाली का आदेश दिया है।

हाईकोर्ट ने 20 साल की सेवा के बाद बर्खास्त शिक्षकों को किया बहाल

Allahabad HC Restores Teachers After 20 Years of Service |

प्रयागराज। राज्य में लंबी सेवा के बाद किसी सरकारी कर्मचारी की सेवा समाप्त करना अनुचित और अन्यायपूर्ण है। खासकर तब जब नियुक्ति में कोई धोखाधड़ी न हो। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह आदेश बीस साल की सेवा के बाद तकनीकी आधार पर हटाये गये दो शिक्षकों की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया।

सरकारी आदेश रद्द, शिक्षकों को सभी लाभ देने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के कई आदेशों को अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया जिनके जरिये 20 साल से सेवा दे रहे दो सहायक शिक्षकों की नियुक्ति को शून्य घोषित किया गया था। साथ ही कोर्ट ने शिक्षकों को सभी लाभ देने का निर्देश दिया। कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने यह आदेश दिया।

कोर्ट ने कहा- तकनीकी आधार पर नहीं छीनी जा सकती नौकरी

हाई कोर्ट ने कहा कि लंबी और निर्विवाद सेवा कर्मचारियों के पक्ष में वैध अधिकार (इक्विटी) उत्पन्न करती है। इसे तकनीकी आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता, जब तक कि किसी प्रकार की धोखाधड़ी सिद्ध न हो। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विभाग की प्रशासनिक लापरवाही या भर्ती प्रक्रिया में देरी का दंड कर्मचारी को नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी ने लंबे समय तक निरंतर सेवा दी है, तो उसकी सेवा समाप्त करना तर्कसंगत नहीं है।

2006 में हुई नियुक्ति, 2025 में अचानक थमा दी गई बर्खास्तगी

न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने यह आदेश मीनाक्षी शर्मा व अन्य की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। याचिका में कहा गया था कि याचियों की नियुक्ति 2006 में गौतमबुद्ध नगर स्थित एक सहायता प्राप्त विद्यालय में हुई थी। चयन प्रक्रिया विधिवत अपनाई गई थी। बाद में विद्यालय को अनुदान सूची में शामिल किया गया, लेकिन इन शिक्षकों को लंबे समय तक वेतन नहीं मिला। 2014 में शासनादेश के बाद वेतन भुगतान की प्रक्रिया शुरू हुई। 2018 में क्षेत्रीय अनुमोदन समिति ने नियुक्तियों को सही मानते हुए वेतन देने का आदेश दिया लेकिन बाद में 2025 में अधिकारियों ने नियुक्ति को अवैध बताते हुए सेवा समाप्त करने का आदेश दे दिया। आरोप था कि बकाया वेतन के मुद्दे पर विचार करते समय सचिव बेसिक शिक्षा ने 2025 में उनकी मूल नियुक्ति को ही अवैध घोषित कर दिया।

बिना सुनवाई कार्रवाई पर शिक्षकों ने उठाए सवाल

शिक्षकों ने कोर्ट में दलील दी कि उनकी नियुक्ति पूरी तरह नियमों के अनुसार हुई थी। 2018 में सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदन मिल चुका है। उन्हें बिना सुनवाई के सेवा से रोका गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने पहले ही केवल वेतन विवाद तक सीमित जांच का निर्देश दिया था। जबकि राज्य सरकार का कहना था कि नियुक्ति विज्ञापन में न्यूनतम योग्यता का उल्लेख नहीं था। 2006 में बीएड योग्यता मान्य नहीं थी। इसलिए नियुक्तियां नियमों के विरुद्ध थीं।

हाईकोर्ट ने माना- अधिकारियों ने सीमा से बाहर जाकर लिया फैसला

हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर नियुक्ति की वैधता पर दोबारा फैसला किया है। 2018 में नियुक्ति को सही मानकर आदेश दिया जा चुका था, इसलिए इसे दोबारा नहीं खोला जा सकता। शिक्षकों को बिना सुनवाई के सेवा से हटाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। शिक्षक करीब 19 वर्षों से कार्यरत हैं, ऐसे में केवल तकनीकी आधार पर सेवा समाप्त करना गलत है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति को आसानी से रद्द नहीं किया जा सकता। यदि कोई धोखाधड़ी नहीं है, तो कर्मचारियों के हितों की रक्षा जरूरी है।

बहाली के आदेश से हजारों कर्मचारियों को मिली राहत

कोर्ट ने आदेश में कहा कि लंबे समय तक काम करने से कर्मचारी में सेवा की निरंतरता की एक वैध अपेक्षा बनती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने शिक्षकों की बर्खास्तगी के आदेशों को रद्द कर उन्हें बहाल करने का निर्देश दिया। यह निर्णय उत्तर प्रदेश में उन हजारों संविदा और कच्चे कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है जो लंबे समय से काम कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें: https://www.primenewsnetwork.in/state/youth-dies-after-kidney-stone-surgery-family-protests/157367

सतना में किडनी स्टोन के ऑपरेशन में गई युवक की जान, परिजनों का हंगामा

Related to this topic: