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बिटकॉइन साढ़े चार महीने में ही 50% ढहा, फरवरी में 19% टूटा

मुंबई। वैश्विक स्तर पर क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन का बुलबुला अब फूटने लगा है। बिटकॉइन करीब चार साल बाद  सबसे खराब मासिक गिरावट की...

बिटकॉइन साढ़े चार महीने में ही 50 ढहा फरवरी में 19 टूटा

बिटकॉइन साढ़े चार महीने में ही 50% ढहा, फरवरी में 19% टूटा |

मुंबई। वैश्विक स्तर पर क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन का बुलबुला अब फूटने लगा है। बिटकॉइन करीब चार साल बाद सबसे खराब मासिक गिरावट की ओर बढ़ रहा है। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन फरवरी में लगभग 19% से ज्यादा टूट चुकी है। 

एशियाई कारोबार के दौरान क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन की कीमत 2.64% गिरकर 62,858 डॉलर पर आ गई। यह जून 2022 के बाद सबसे खराब मासिक प्रदर्शन है। मौजूदा गिरावट के बाद बिटकॉइन अपने 6 अक्टूबर 2025 के रिकॉर्ड हाई 1,26,272 डॉलर से करीब 50% नीचे ट्रेड कर रहा है। यह लगातार पांचवां महीना है जब इसमें गिरावट दर्ज हो रही है। 2018 के बाद यह गिरावट का सबसे लंबा सिलसिला है। बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। निवेशकों की चिंता गहराई है। ताजा कमजोरी की बड़ी वजह अमेरिकी व्यापार नीति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता है। 

बिटकॉइन में गिरावट लगातार पांचवें महीने से अवरत जारी है।यह 2018 के बाद से गिरावट का सबसे लंबा दौर है। इस बीच, एथेरियम जैसी अन्य क्रिप्टोकरेंसी 1900 डॉलर से नीचे गिर गईं, जबकि एक्सआरपी 1.34 डॉलर, बीएनबी 598.73 डॉलर, सोलाना 77.7 डॉलर और डॉगकॉइन 0.092 डॉलर पर कारोबार कर रही है।

क्रिप्टोकरेंसी में गिरावट के बाद बिटकॉइन अक्टूबर की शुरुआत में बनाए गए अपने उच्चतम स्तर 126,272 डॉलर से लगभग 50% नीचे कारोबार कर रहा है। इस गिरावट के पीछे भी अमेरिकी टैरिफ को माना जा रहा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए टैरिफ के एक बड़े हिस्से को रद्द कर दिया। इसके जवाब में ट्रम्प ने वैकल्पिक कानूनी ढांचे के तहत 15% यूनिवर्सल टैरिफ का ऐलान किया। हालांकि मंगलवार आधी रात से केवल 10% शुल्क लागू हुआ।

उन्होंने चेतावनी दी कि वॉशिंगटन के साथ हाल के व्यापार समझौतों पर फिर से बातचीत की कोशिश करने वाले देशों पर और अधिक शुल्क लगाया जा सकता है। इस वजह से क्रिप्टोकरेंसी बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। 

"डेल्टा एक्सचेंज" की रिसर्च एनालिस्ट रिया सहगल का मानना है कि व्यापक बाजार स्थिरता संभवतः मैक्रो आर्थिक चुनौतियों में कमी और पूंजी प्रवाह में सुधार पर निर्भर करेगी, जो कि वर्तमान परिवेश में अभी भी अनिश्चित नजर आ रही हैं।

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