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दवा दुकानों की हड़ताल से लोग परेशान

ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में औरंगाबाद की दवा दुकानें बंद, इमरजेंसी दवाओं की किल्लत

ऑल इंडिया ऑरगेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के द्वारा ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में देशव्यापी हड़ताल का औरंगाबाद में काफी असर है।

ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में औरंगाबाद की दवा दुकानें बंद इमरजेंसी दवाओं की किल्लत

Chemist Strike Hits Aurangabad, Patients Stranded as Medical Stores Close |

औरंगाबाद (बिहार)। ऑल इंडिया ऑरगेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के द्वारा ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में देशव्यापी हड़ताल का औरंगाबाद में काफी असर है। दवा दुकानों के बंद होने से शहर से लेकर गांव तक के लोग बेहद परेशान है और कई इमरजेंसी दवाओं की खरीद के लिए भटक रहे हैं। लेकिन उन्हें दवा नहीं मिल पा रही है।

जरूरी दवाओं के लिए भटकने को मजबूर मरीज

मदनपुर से दवा लेने पहुंचे सुरेश प्रजापति ने बताया कि उन्हें चिकित्सकों के द्वारा बीपी के लिए टेलमा एच दवा प्रतिदिन खाने की सलाह दी गई थी। दवा खत्म होने के बाद जब आज उसे खरीदने पहुंचा तो सभी दुकानें बंद मिली। उसका सब्सिट्यूट दवा बिना चिकित्सक के सलाह के नहीं खा सकते। ऐसी स्थिति में आज उन्हें बिना दवा खाए ही रहना पड़ेगा। बारुण से आए सुधीर ने बताया कि उन्हें टेलसार्टन एच एवं स्टाटर 10 की जरूरत थी, मगर दवा आज नहीं मिली।

इमरजेंसी दुकानों पर भी नहीं मिल रही दवाई

ऐसे कई लोग दवा खत्म होने के बाद पहुंचे लेकिन जरूरत वाली कोई दवा नहीं मिल रही है। हालांकि इमरजेंसी की स्थिति में प्रत्येक प्रखंड एवं जिला मुख्यालय में एक दवा दुकान खोले गए है। मगर वे ग्राहकों के विश्वास पर खरे नहीं उतर रहे हैं। लोगों ने बताया कि शहर में जितने भी नर्सिंग होम है वहां ये दवाएं उपलब्ध नहीं है।

ऑनलाइन दवा बिक्री से कारोबार प्रभावित

इधर, इस संबंध में दवा विक्रेता एवं जिला केमिस्ट ड्रगिस्ट एसोसिएशन के पूर्व सचिव सतीश कुमार सिंह ने बताया कि कोरोना काल के वक्त सरकार ने दवा की होम डिलीवरी की व्यवस्था की थी। कोरोना समाप्त हुए चार वर्ष हो गए। उसके बावजूद भी ऑनलाइन दवाओं की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। जिससे मेडिकल दुकान की बिक्री पर भारी असर पड़ रहा है। लेकिन सरकार के द्वारा इस दिशा में कोई पहल नहीं की जा रही थी।

नकली और नशीली दवाओं पर जताई चिंता

उन्होंने बताया कि ऑनलाइन कंपनियां इस आड़ में नकली, नशीली और डुप्लीकेट दवाएं धड़ल्ले से बेच रही हैं, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में बिना चिकित्सीय पर्ची के नशे के दवा भी ऑनलाइन के माध्यम से घर तक पहुंच जा रही है। जिससे युवा पीढ़ी नशे के गिरफ्त में आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि आज यह बंदी सांकेतिक है। यदि सरकार थोक एवं खुदरा दवा दुकानों के हित के बारे में गंभीरता से विचार नहीं करेगी तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और प्रभावी बनाया जाएगा।

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