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मध्यप्रदेश जेनको को जांच टीम की रिपोर्ट का इंतजार

SGTP कोयला रैक हादसे में बड़ा खुलासा, 4 नहीं बल्कि 18 मीट्रिक टन कोयला था मौजूद

संजय गांधी ताप विद्युत गृह (एसजीटीपी) में 30 जनवरी की रात दुर्घटनाग्रस्त हुई कोयला रैक को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है।

sgtp कोयला रैक हादसे में बड़ा खुलासा 4 नहीं बल्कि 18 मीट्रिक टन कोयला था मौजूद

फाइल फोटो |

उमरिया। संजय गांधी ताप विद्युत गृह (एसजीटीपी) में 30 जनवरी की रात दुर्घटनाग्रस्त हुई कोयला रैक को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। प्रारंभिक तौर पर रैक में 4 मीट्रिक टन कोयला होने की बात कही जा रही थी, लेकिन अब सूत्रों के अनुसार दुर्घटनाग्रस्त रैक में करीब 18 मीट्रिक टन (एमटी) कोयला मौजूद था। इस पूरे मामले में मध्य प्रदेश पावर जनरेशन कंपनी (एमपी जेनको) अब जांच टीम की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।

वजन का अंतर बताता है रैक का लोड

सूत्रों के मुताबिक, दुर्घटना के बाद एसजीटीपी से वापस लौटी रैक का वजन 40 एमटी दर्ज किया गया। नियमों के अनुसार यदि रैक पूरी तरह खाली होती, तो उसका अधिकतम वजन लगभग 22 एमटी होना चाहिए था। ऐसे में वजन में आया अंतर यह संकेत देता है कि रैक में करीब 18 एमटी कोयला बिना अनलोड किए ही वापस भेज दिया गया।

पूरी तरह अनलोड किये बिना प्लांट से बाहर भेजे गये रैक

इस लापरवाही से ठेका कंपनी को करीब 10 लाख रुपये का डिमरेज नोट भरना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, यह भी सामने आया है कि केवल 30 जनवरी ही नहीं, बल्कि इससे पहले भी कई बार कोयला बिना पूरी तरह अनलोड किए प्लांट से बाहर भेजा गया। जांच टीम इस संबंध में उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर पड़ताल कर रही है।

कोयला हैंडलिंग के दस्तावेज खंगाले

जांच टीम ने शनिवार 31 जनवरी को उमरिया स्थित एसजीटीपी का दौरा किया। टीम ने दुर्घटनाग्रस्त रैक के साथ-साथ कोयला हैंडलिंग से जुड़े सभी दस्तावेज खंगाले। वहीं, एमपी जेनको के अधिकारियों से भी पूछताछ की गई है। बताया जा रहा है कि 2 जनवरी को जब इस मामले का शुरुआती खुलासा हुआ था, तब भी रैक में अपेक्षा से अधिक कोयला पाए जाने के संकेत मिले थे। इसके बाद से ही कोयला अनलोडिंग प्रक्रिया और ठेका कंपनी की भूमिका संदेह के घेरे में है।

रिपोर्ट के बाद दोषियों पर होगी कार्रवाई

एमपी जेनको प्रबंधन का कहना है कि जांच टीम की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। यदि कोयला अनलोडिंग में जानबूझकर लापरवाही या वित्तीय अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों और ठेका कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है।

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