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मुख्यमंत्री के काफिले के सामने कांग्रेस का विरोध, शहडोल में गरमाई सियासत

जिले की सियासत उस वक्त गरमा गई जब डॉ. मोहन यादव के धनपुरी प्रवास के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके काफिले के सामने काले झंडे लहराकर विरोध दर्ज कराया।

मुख्यमंत्री के काफिले के सामने कांग्रेस का विरोध शहडोल में गरमाई सियासत

Congress Protest Halts CM Convoy in Shahdol |

शहडोल। जिले की सियासत उस वक्त गरमा गई जब डॉ. मोहन यादव के धनपुरी प्रवास के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके काफिले के सामने काले झंडे लहराकर विरोध दर्ज कराया। घटना बुढ़ार थाना क्षेत्र की हाथीडोल हीरा कॉलोनी के पास हुई, जहाँ अचानक हुए इस प्रदर्शन से कुछ समय के लिए मुख्यमंत्री का काफिला रुक गया और सुरक्षा व्यवस्था में हलचल मच गई।

कोंग्रेस कार्यकर्ताओं ने दिखाए काले झंडे

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही काफिला मौके पर पहुँचा, पहले से मौजूद कुछ कोंग्रेस कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। "मुर्दाबाद" के नारों से माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को देखते हुए सुरक्षा में तैनात कर्मी तत्काल वाहनों से उतरे और प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की।

कलेक्टर की भूमिका पर उठा सवाल

घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें शहडोल कलेक्टर डॉ. केदार सिंह स्वयं प्रदर्शनकारियों को हटाते दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि उन्होंने भीड़ को तितर-बितर करने के दौरान डंडा चलाया। इस दृश्य ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। क्या प्रशासन ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया या यह सुरक्षा प्रोटोकॉल का हिस्सा था..?

पहले से चल रहा था विरोध

जानकारी के अनुसार, इससे पहले जिलाध्यक्ष अजय अवस्थी के नेतृत्व में करीब 40 कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बुढ़ार के बीईओ कार्यालय के सामने नारेबाजी की थी। पुलिस ने सभी को हिरासत में लेकर बुढ़ार थाने पहुँचाया। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यह "लोकतांत्रिक विरोध" था, जिसे प्रशासन ने दबाने का प्रयास किया।

सुरक्षा बनाम अभिव्यक्ति की आज़ादी

मुख्यमंत्री जैसे वीआईपी दौरे में सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता काफिले की निर्बाध आवाजाही और किसी भी अप्रिय घटना को रोकना होती है। लेकिन विपक्ष इसे "आवाज़ दबाने" की कार्रवाई बता रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा स्थानीय राजनीति में बड़ा रूप ले सकता है।

प्रशासन का पक्ष

हालाँकि प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा मानकों के तहत ही कार्रवाई की गई। काफिले के सामने अचानक विरोध प्रदर्शन को गंभीर सुरक्षा जोखिम माना जाता है। शहडोल की यह घटना सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि प्रशासनिक सख्ती और राजनीतिक असहमति के टकराव की तस्वीर बनकर उभरी है। वीडियो सामने आने के बाद मामला और गरमा सकता है, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा जिले की राजनीति का केंद्र बन सकता।

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