अररिया (बिहार)। बिहार के अररिया जिले में परमान नदी पर बने झामटा-महिश्कोल पुल में दरारें पड़ गई हैं। पुल का एक मुख्य स्तंभ धंस गया है। इससे इसके निर्माण के महज चार साल बाद ही इसकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। साल 2022 में करीब ₹7.32 करोड़ की लागत से निर्मित इस पुल की मुख्य रेलिंग में दरारें दिखाई दे रही हैं, जिसके चलते प्रशासन ने भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी है।
लोगों का फूटा गुस्सा, इंजीनियर के निलंबन की उठी मांग
इस घटना के बाद स्थानीय निवासी घटनास्थल पर जमा हो गए और निर्माण कार्य में कथित खामियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए, "हम भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस पुल के इंजीनियर को निलंबित करो।" जन सूरज के नेता फैसल जावेद यासीन ने भी निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पुल निर्माण के दौरान ही इस संबंध में चिंताएं जताई गई थीं।
निर्माण के समय ही उठे थे घटिया सामग्री इस्तेमाल के आरोप
फैसल जावेद यासीन ने कहा कि, "इस पुल के बने चार साल भी पूरे नहीं हुए हैं। पुल के निर्माण के दौरान हमने और स्थानीय ग्रामीणों ने कई सवाल उठाए थे कि इसमें स्थानीय रेत और घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है।" उन्होंने आगे आरोप लगाया कि इंजीनियरों और अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि गलतियाँ नहीं दोहराई जाएंगी और पुल सुरक्षित रहेगा।
10 पंचायतों और नेपाल बॉर्डर का संपर्क खतरे में
उन्होंने कहा, "इंजीनियरों और अधिकारियों ने कहा था कि जो भी गलतियाँ हुई हैं, वे नहीं दोहराई जाएंगी और पुल नहीं टूटेगा। हम चाहते हैं कि हर हाल में यातायात सुचारू रूप से चलता रहे। कम से कम 10-12 पंचायतें इससे जुड़ी हुई हैं। यह पुल कम से कम 10 पंचायतों को जोड़ता है और नेपाल सीमा तक जाता है।" (एएनआई)
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