भोपाल। नर्सिंग घोटाले और मध्य प्रदेश में पैरामेडिकल शिक्षा संकट का खुलासा होने के बाद, अब CAG ने जबलपुर स्थित राज्य की एकमात्र मेडिकल यूनिवर्सिटी में गंभीर अनियमितताओं की औपचारिक पुष्टि की है।
भोपाल। नर्सिंग घोटाले और मध्य प्रदेश में पैरामेडिकल शिक्षा संकट का खुलासा होने के बाद, अब CAG ने जबलपुर स्थित राज्य की एकमात्र मेडिकल यूनिवर्सिटी में गंभीर अनियमितताओं की औपचारिक पुष्टि की है।
वित्तीय कुप्रंधन की गंभीर स्थिति
विधानसभा में पेश 2020 से 2022-23 तक की CAG ऑडिट रिपोर्ट में प्रशासनिक विफलताओं, पारदर्शिता की कमी, नियम उल्लंघन और वित्तीय कुप्रबंधन की गंभीर तस्वीर सामने आई है। इससे हजारों छात्र और दर्जनों कॉलेज प्रभावित हुए।
छात्र रहे अंधेरे में क्योंकि जानकारी छुपाते रहे
ऑडिट में पाया गया कि मेडिकल यूनिवर्सिटी ने नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेजों से संबंधित पूर्ण जानकारी अपनी वेबसाइट पर अपलोड नहीं की। यह स्पष्ट नहीं था कि कौन सा संस्थान किस कोर्स से संबद्ध है या कितने छात्र नामांकित हैं। इस कारण छात्र यह सत्यापित नहीं कर पाए कि उनका कॉलेज विधिवत संबद्ध है या नहीं। जांच में कई ऐसे संस्थान सामने आए, जो सिर्फ कागजों पर मौजूद थे। कक्षाएं बंद और प्रयोगशालाएं निष्क्रिय थीं। अब CAG ने भी पुष्टि की है कि नियामक स्तर पर पारदर्शिता का अभाव था। CAG ने 76 संस्थानों का निरीक्षण किया, जिनमें से 32 में गंभीर कमियां पाई गईं। इसके बावजूद आवश्यक बुनियादी ढांचे के बिना संबद्धता दी गई।
बिना आधारभूत ढांचे के कॉलेजों को संबद्धता
सूनी कक्षाएं, जालों से ढके लैब उपकरण और शिक्षकों-छात्रों के बिना कैंपस दिखे। कई पैरामेडिकल कॉलेजों में वर्षों से कक्षाएं नहीं लगीं, लेकिन पुराने बैचों की परीक्षाएं होती रहीं। CAG रिपोर्ट ने पुष्टि की कि अनिवार्य मानकों को पूरा किए बिना संबद्धता दी गई। राज्य में 243 से अधिक पैरामेडिकल संस्थान और लगभग 48,000 छात्र नामांकित हैं, लेकिन 2020 से शैक्षणिक सत्रों में देरी हो रही है। परीक्षाएं समय पर नहीं हुईं, परिणाम लंबित हैं और 2025 बैच का प्रवेश अधूरा है।
नियमों विरुद्ध ₹55 करोड़ जारी
नियमों के अनुसार, रखरखाव भुगतान केवल संबद्ध संस्थानों को ही दिया जा सकता है। लेकिन यूनिवर्सिटी ने ₹39.69 करोड़ MGM मेडिकल कॉलेज, इंदौर को और ₹15.83 करोड़ जबलपुर मेडिकल कॉलेज को हस्तांतरित किए — कुल ₹55.52 करोड़। यूनिवर्सिटी ने इसे कार्यकारी परिषद की मंजूरी बताया, लेकिन CAG ने इसे अस्वीकार करते हुए राशि वसूली के निर्देश दिए।
रिक्त पद, आउटसोर्सिंग और ₹84 लाख भुगतान
मेडिकल एजुकेशन विभाग ने 275 पद स्वीकृत किए थे, लेकिन 2023 तक 184 पद खाली थे। रेक्टर, प्रशासनिक अधिकारी, वित्त अधिकारी जैसे 16 महत्वपूर्ण पद कभी भरे ही नहीं गए। पद भरने के बजाय आउटसोर्सिंग के जरिए अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति की गई। दिसंबर 2021 से मार्च 2023 के बीच HITES एजेंसी को ₹84.19 लाख भुगतान किए गए। इसके अलावा 551 संस्थानों से एकत्रित ₹98.60 करोड़ की एंडोमेंट राशि जमा नहीं की गई। वार्षिक लेखे तैयार नहीं किए गए।
पिछली तारीख से मान्यता और अदालत विवाद
2022-23, 2023-24 और 2024-25 के लिए एक साथ पिछली तारीख से मान्यता देने का मामला सामने आया। अलग-अलग सत्रों के छात्रों को एक ही बैच में रखा गया। मामला हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।
जमीनी हकीकत है कि वर्षों की बर्बादी
अगर-मालवा में छात्र तीन साल से प्रथम वर्ष का पाठ्यक्रम पढ़ रहे हैं। कई जिलों में लाइब्रेरी हैं, पर कक्षाएं खाली हैं। कई सरकारी कॉलेजों में भी छात्रों की पढ़ाई समय पर पूरी नहीं हो पा रही। नर्सिंग में 28,560 स्वीकृत सीटों में से केवल 17,735 पंजीकरण हुए हैं। 21 सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में से केवल 8 को मान्यता प्राप्त है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर खतरा
पैरामेडिकल और नर्सिंग पेशेवर अस्पतालों की रीढ़ हैं। CAG रिपोर्ट से स्पष्ट है कि प्रशासनिक कुप्रबंधन, वित्तीय अनियमितता और देरी ने पूरी पीढ़ी के स्वास्थ्यकर्मियों का भविष्य खतरे में डाल दिया है। इसका असर केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहेगा— प्रशिक्षित तकनीशियनों और नर्सों की कमी का खामियाजा अंततः मरीजों को भुगतना पड़ेगा।
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