मध्य प्रदेश में अब तक का सबसे बड़ी टैक्स डिमांड नोटिस सेंट्रल जीएसटी एंड एक्साइज कमिश्नरेट, इंदौर ने जारी किया है। यह नोटिस गुटखा कारोबारी किशोर वाधवानी सहित अन्य के खिलाफ जारी किया गया है।
इंदौर। मध्य प्रदेश में अब तक का सबसे बड़ी टैक्स डिमांड नोटिस सेंट्रल जीएसटी एंड एक्साइज कमिश्नरेट, इंदौर ने जारी किया है। यह नोटिस गुटखा कारोबारी किशोर वाधवानी सहित अन्य के खिलाफ जारी किया गया है। नोटिस 2 हजार करोड़ का टैक्स का डिमांड है।
इसमें पहले फरवरी 2025 में अन्य आरोपियों के खिलाफ आदेश पारित हो चुका है। 76 करोड़ रुपये के सेंट्रल की एक्साइज चोरी के मामले में डिमांड आदेश आना शेष है। कुल टैक्स चोरी 2000 करोड़ रुपये की है। यह आदेश 2020 में डीजीजीआई के आपरेशन कर्क के तहत की गई जांच के आधार पर एक एडजुटिकेटिंग ऑथारिटी ज्वाइंट कमिश्नर य़ोगेश पांडेय दारा पारित किया गया है। यह मध्यप्रदेश में किसी भी कारोबारी के खिलाफ होने वाली सबसे बड़ी राशि का आदेश है।
टैक्स चोरी के मामले में 'एलोरा टोबैको' और 'दबंग दुनिया' समेत कई संस्थानों को नोटिस
मालूम हो कि यह नोटिस एलोरा टोबैको, दबंग दुनिया पब्लिकेशन, किशोर वाधवानी, श्याम खेमानी, अनमोल मिश्रा, धर्मेंद्र पीठादिया, राजू शर्मा, मे. शिमला इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, देवेंद्र द्विवेदी, विनायक फिल्टर्ड प्राइवेट लिमिटेड और विनोद बिदासरिया को टैक्स चोरी के मामले में दिया गया है। इसके साथ ही रमेश परिहार, टीएएन इंटरप्राइजेज, एसआर ट्रेडिंग, निश्का इंटरप्राइजेज, मे. इंक फ्रूट, मे एमएन इंतरप्राजजेज, मे. रानी प्रेस प्राइवेट लिमिटेड, जौहर हसन, एनजी ग्राफिक्स एंड ब्लॉक मेकर्स के नाम भी नोटिस में हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की अपील, हाईकोर्ट के फैसले को ठहराया सही
आरोपियों ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। हालांकि हाईकोर्ट ने अपील खारिज करते हुए कहा कि ये जानबूझकर केस को टालने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही याचिकाकर्ता पर 2 लाख रुपये की पेनाल्टी भी लगाई। इसके बाद वाधवानी और उनके साथियों ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। वहां भी 2 दिसंबर 2025 को उनकी अपील खारिज कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया। इसके बाद 6 दिसंबर को टैक्स डिमांड नोटिस जारी किया गया। 2002 करोड़ के टैक्स डिमांड नोटिस में 75.67 करोड़ रुपये की एक्साइज ड्यूटी लगाई गई है।
एलोरा टोबैको में ऐसे होती थी धांधली
सांवेर औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्री ने सिगरेट बनाने का लाइसेंस लेकर क्षमता से कई गुना बड़ी मशीन लगाई। बिजली बचाने को डीजल जेनरेटर चलाया। कच्चा माल औऱ तैयार सिगरेट बाथरुम की खिड़की से अंदर-बाहर होता था। रात में उत्पादन होता था और दबंग दुनिया के डिलीवरी वाहनों से सप्लाई की जाती थी। जीएसटी अधिकारियों को दिखाने के लिए थोड़ा माल मुख्य द्वार से भी भेजते थे। दो ब्रांड गांव में बिना बिल के बिकते थे।
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