लोकसभा ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण विधेयक को मंजूरी दे दी, जिसके जरिए अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र और स्थायी राजधानी के रूप में कानूनी मान्यता मिल गई है।
नई दिल्ली। लोकसभा ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण विधेयक को मंजूरी दे दी, जिसके जरिए अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र और स्थायी राजधानी के रूप में कानूनी मान्यता मिल गई है। इस प्रस्ताव को सत्तारूढ़ एनडीए के साथ-साथ विपक्षी कांग्रेस का भी समर्थन मिला, जबकि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) ने इसका विरोध करते हुए मतदान के समय सदन से वॉक आउट किया।
भविष्य में बदलाव की गुंजाइश खत्म
सरकार का कहना है कि यह कानून भविष्य में राजधानी को बदलने की किसी भी संभावना को खत्म करने के उद्देश्य से लाया गया है। ध्वनि मत से पारित इस विधेयक को मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के लिए एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने चर्चा का जवाब देते हुए बताया कि यह कदम राज्य के विधानसभा द्वारा पारित उस प्रस्ताव को कानूनी रूप देने के लिए उठाया गया है, जिसमें अमरावती को ही एकमात्र राजधानी बनाने की मांग की गई थी। नए प्रावधानों के तहत 2 जून 2024 से अमरावती आधिकारिक रूप से राज्य की स्थायी राजधानी होगी।
समर्थन के साथ उठी विशेष राज्य दर्जे की मांग
चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद बी. मणिकम टैगोर ने विधेयक का समर्थन किया, लेकिन साथ ही आंध्र प्रदेश को विशेष श्रेणी का दर्जा देने की मांग भी दोहराई। उन्होंने उम्मीद जताई कि अमरावती का विकास बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों की तर्ज पर होगा। वहीं, भाजपा सांसद सी.एम. रमेश ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि आजादी के बाद यह पहली बार है जब संसद किसी शहर को राज्य की राजधानी घोषित करने के लिए कानून बना रही है। उनका कहना था कि इससे राज्य की आर्थिक स्थिति और विकास को मजबूती मिलेगी।
YSRCP का विरोध, किसानों और फंडिंग पर सवाल
हालांकि, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने इस कानून पर गंभीर सवाल उठाए। पार्टी के सांसद पी.वी. मिथुन रेड्डी ने आरोप लगाया कि राजधानी के लिए ली गई करीब 34,000 एकड़ जमीन के बदले किसानों से किए गए वादे अभी तक पूरे नहीं हुए हैं। उन्होंने प्लॉट आवंटन और अन्य सुविधाओं के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करने की मांग की। साथ ही, उन्होंने परियोजना के लिए आवश्यक भारी वित्तीय संसाधनों के स्रोत पर भी सवाल खड़े किए और अपनी पार्टी के 'तीन राजधानी' मॉडल का समर्थन किया।
अमरावती के विकास और पहचान का रास्ता साफ
गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत हैदराबाद को दस साल के लिए आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की साझा राजधानी बनाया गया था। इस अवधि के समाप्त होने के बाद अब अमरावती को राज्य की स्थायी राजधानी के रूप में कानूनी दर्जा दिया जा रहा है। विधेयक में यह भी उल्लेख किया गया है कि अमरावती के विकास के लिए प्रशासनिक और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं। राज्य विधानसभा के प्रस्ताव के बाद संसद द्वारा अधिनियम की धारा 5 में संशोधन कर इस प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया है।
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