ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के विरोध में बुधवार को चंदौली जिला समेत पूरे प्रदेश में दवा विक्रेताओं ने अपनी दुकानें बंद रखीं।
चंदौली (उत्तर प्रदेश)। ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के विरोध में बुधवार को चंदौली जिला समेत पूरे प्रदेश में दवा विक्रेताओं ने अपनी दुकानें बंद रखीं। यह विरोध प्रदर्शन ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर आयोजित किया गया था, जिसे जिले के दवा कारोबारियों का व्यापक समर्थन मिला।
ई-फार्मेसी से छोटे कारोबारियों पर संकट
दवा विक्रेता समिति, जिला चंदौली के वरिष्ठ उपाध्यक्ष आशीष कुमार अग्रवाल ने बताया कि ऑनलाइन दवा बिक्री के बढ़ते चलन से पारंपरिक मेडिकल स्टोरों के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। उन्होंने कहा कि ई-फार्मेसी मॉडल स्थानीय दवा व्यवसाय को प्रभावित कर रहा है, जिससे छोटे व्यापारियों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।
नकली दवाओं और कारोबार प्रभावित होने की चिंता
अग्रवाल ने विरोध के पीछे चार प्रमुख कारण बताए। पहला, ऑनलाइन माध्यम से दवाओं की बिक्री स्थानीय मेडिकल स्टोरों के कारोबार को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही है। दूसरा, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए नकली दवाओं की आपूर्ति की आशंका बढ़ रही है, जिससे जन स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है।
नशीली दवाओं की बिक्री और भारी छूट पर सवाल
तीसरा कारण यह है कि कई नशीली और नियंत्रित दवाओं की अवैध बिक्री का जोखिम बढ़ रहा है, जबकि ये दवाएं केवल चिकित्सकीय पर्चे पर ही उपलब्ध होनी चाहिए। चौथा, बड़ी कंपनियों द्वारा दी जा रही भारी छूट बाजार संतुलन को बिगाड़ रही है, जिससे छोटे दुकानदार प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थ हो रहे हैं।
जिलेभर में मेडिकल दुकानों ने दिया समर्थन
यह विरोध प्रदर्शन जिले के विभिन्न क्षेत्रों जैसे सकलडीहा, कमालपुर, धानापुर, नौगढ़ और मुगलसराय में भी देखा गया। दवा विक्रेताओं के अनुसार, जिले में लगभग 1200 से 1300 पंजीकृत मेडिकल स्टोर हैं, जिनमें से 600 से 700 दुकानों ने इस बंदी में भाग लिया।
व्यापारियों ने आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी
मुगलसराय के वात्सल्य मेडिकल, धर्मशाला रोड के सुशील कुमार जायसवाल ने पुष्टि की कि जिले की अधिकांश मेडिकल दुकानें बंद रहीं और व्यापारियों ने एकजुट होकर ऑनलाइन दवा बिक्री का विरोध किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं करती है, तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर अनिश्चितकालीन बंद का भी समर्थन किया जाएगा। दवा विक्रेताओं ने सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर सख्त नियम लागू करने और पारंपरिक मेडिकल व्यवसाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
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