तीन साल के मासूम की हत्या के सनसनीखेज मामले में अपर सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है।
ग्वालियर। तीन साल के मासूम की हत्या के सनसनीखेज मामले में अपर सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने प्रेम-संबंध उजागर होने के डर से अपने ही बेटे को दो मंजिला इमारत से फेंकने की वाली मां ज्योति राठौर को हत्या का दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई है। उधर, सबूतों के अभाव में आरोपी महिला के प्रेमी उदय इंदोलिया को बरी कर दिया गया।
प्रेम संबंध छुपाने रास्ते से बेटे को हटाना चाहती थी
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना के समय के ऑडियो रिकॉर्डिंग और CCTV फुटेज से यह साफ हुआ कि बच्चे की मौत हादसा नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या थी। जांच में सामने आया कि महिला अपने प्रेम-संबंध को छिपाने के लिए बच्चे को रास्ते से हटाना चाहती थी।
परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, डिजिटल सबूत पर आधारित फैसला
अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रत्यक्षदर्शी न होने के बावजूद परिस्थितिजन्य साक्ष्य, डिजिटल सबूत और घटनाक्रम की कड़ी एक-दूसरे से जुड़ती है, जिससे आरोपी मां का अपराध सिद्ध होता है। इसी आधार पर न्यायालय ने उसे दोषी ठहराया।
प्रेमी को संदेह का लाभ
हालांकि, मामले में आरोपी बनाए गए महिला के प्रेमी के खिलाफ ठोस और प्रत्यक्ष प्रमाण पेश नहीं हो सके। इसी कारण न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए उसे दोषमुक्त कर दिया।
मासूम के खिलाफ अपराध पर कोई नरमी नहीं
इस फैसले के जरिए अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि मासूम बच्चों के खिलाफ अपराध में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी और डिजिटल साक्ष्य भी न्यायिक प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
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