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हाईकोर्ट का जलाशयों के पुनर्जीवन के लिए नीति...

जल संकट पर हाईकोर्ट सख्त: प्रदेश में जलाशयों के पुनर्जीवन की नीति बनाने के निर्देश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने राज्य सरकार को पूरे प्रदेश में जलाशयों के पुनर्जीवन के लिए नीति बनाने की दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

जल संकट पर हाईकोर्ट सख्त प्रदेश में जलाशयों के पुनर्जीवन की नीति बनाने के निर्देश

MP High Court Orders Policy for Revival of Water Bodies |

बड़वानी। जिले के ब्लॉक पाटी के चिकल्कुआवाड़ी गांव और आसपास के क्षेत्रों में पानी की गंभीर कमी को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने राज्य सरकार को पूरे प्रदेश में जलाशयों के पुनर्जीवन के लिए नीति बनाने की दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

पीआईएल के आधार पर निर्देश

यह निर्देश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने दिया गया। यह जनहित याचिका (PIL) मई 2024 में प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट के आधार पर दर्ज की गई थी, जिसमें प्रभावित गांवों में तीव्र जल संकट की बात कही गई थी। बेंच में न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी शामिल थे।

इन्होंने की मामले की पैरवी

इस मामले में अधिवक्ता मनीष कुमार विजयवर्गीय अमीकस क्यूरी (न्यायालय मित्र) के रूप में उपस्थित हुए, जबकि राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता (DAG) सुदीप भार्गव ने पक्ष रखा।

अतिरिक्त महाधिवक्ता से मांगी थी जानकारी

इससे पहले 13 अक्टूबर 2025 को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता से यह जानकारी मांगी थी कि क्या राज्य सरकार या किसी विभाग/जल निगम के पास सरकारी भूमि पर सूखे कुओं, बावड़ियों के पुनर्जीवन, तालाब निर्माण, जलाशय (तालाब) आदि के लिए कोई योजना या स्कीम मौजूद है या नहीं, जिससे वैकल्पिक जल स्रोत तैयार हो सके।

जलाशयों के पुनर्जीवन की कोई योजना नहीं

15 जनवरी 2026 को राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि फिलहाल इस प्रकार के जलाशयों के पुनर्जीवन के लिए कोई योजना या स्कीम मौजूद नहीं है। हालांकि, सरकार ने यह भी जानकारी दी कि राजस्थान के पिपलांत्री गांव की तर्ज पर एक योजना बनाने के लिए सरकार को पत्र लिखा गया है। सरकार ने अदालत से समय मांगा ताकि इस पत्राचार को रिकॉर्ड पर प्रस्तुत किया जा सके। यह पत्र राज्य के सभी आयुक्तों और कलेक्टरों को संबोधित था, जिसकी प्रति जवाब के साथ अदालत में प्रस्तुत कर दी गई।

अधिकारियों को नीति बनाने के निर्देश

पक्षकारों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड पर रखे गए पत्राचार पर विचार करने के बाद, हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रमुख सचिव (राजस्व) सभी आयुक्तों और कलेक्टरों की बैठक (प्रत्यक्ष रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से) आयोजित करें, ताकि राज्य में जलाशयों के पुनर्जीवन के लिए नीति तैयार की जा सके।

बैठक एक माह में आयोजित करें

खंडपीठ ने उम्मीद जताई कि यह बैठक आदेश की तारीख से एक माह के भीतर आयोजित कर ली जाए और इसकी अनुपालन रिपोर्ट महाधिवक्ता कार्यालय के माध्यम से हाईकोर्ट में प्रस्तुत की जाए। हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि बैठक में अमीकस क्यूरी और उप महाधिवक्ता द्वारा दिए गए सुझावों पर भी विचार किया जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च 2026 को निर्धारित की गई।

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