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राजस्व मंत्री ने माना, अफसरशाही में भ्रष्टाचार मौज

राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा का भ्रष्टाचार पर विवादित बयान, ईमानदारी पर जोर

मध्य प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा अपने बेबाक और अक्सर विवादों में रहने वाले बयानों के कारण एक बार फिर चर्चा में हैं।

राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा का भ्रष्टाचार पर विवादित बयान ईमानदारी पर जोर

MP Revenue Minister Karan Singh Verma Comments on Corruption |

राजगढ़/भोपाल। मध्य प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा अपने बेबाक और अक्सर विवादों में रहने वाले बयानों के कारण एक बार फिर चर्चा में हैं। राजगढ़ में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर एक बड़ी स्वीकारोक्ति की। उनसे जब मंत्री से कलेक्टरों द्वारा पैसे लेने के संबंध में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "कहीं न कहीं थोड़ा-बहुत तो हर जगह होता है।" हालांकि, उन्होंने तुरंत यह भी जोड़ा कि जो व्यक्ति रिश्वत लेता है, वह 'राष्ट्रद्रोही' है, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो।

बईमानी पद से जुड़ी नहीं होती, ईमानदारी से काम करने की अपील

मंत्री वर्मा ने दार्शनिक अंदाज में कहा कि बेईमानी पद से नहीं जुड़ी होती, बल्कि यह व्यक्ति की आदत बन जाती है। उन्होंने कहा, "चाहे किसी को मंत्री बना दिया जाए, तहसीलदार बना दिया जाए या मजदूरी करने भेज दिया जाए, बेईमान व्यक्ति अपनी आदत नहीं बदलता।" उन्होंने खुलासा किया कि कई बार कलेक्टर जिम्मेदारी टालने के लिए कह देते हैं कि "साहब, थोड़ी बहुत गलती हो गई है तो ठीक कर देंगे।" लेकिन मंत्री ने स्पष्ट किया कि वे इस सोच के पक्ष में नहीं हैं और उन्होंने अधिकारियों से ईमानदारी व राष्ट्रभक्ति के साथ काम करने की अपील की।

यह विवाद भी सामने आया

मंत्री ने अपनी सक्रियता का हवाला देते हुए बताया कि उन्होंने राजगढ़, आष्टा और सिवनी जैसे स्थानों पर गड़बड़ी पाए जाने पर कई तहसीलदारों को मौके पर ही निलंबित (Suspend) किया है। हाल ही में सीहोर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने लाड़ली बहना योजना की लाभार्थियों को लेकर कहा था कि जो बहनें कार्यक्रम के मंच पर (आयोजनों में) नहीं आएंगी, उनके नाम सूची से काट दिए जाएंगे। इस बयान पर भारी विरोध होने के बाद उन्हें सफाई देनी पड़ी थी और वे बैकफुट पर आ गए थे।

खुद लालच नहीं करते, तो अधिकारी क्यों नहीं

मंत्री ने अपनी ईमानदारी साबित करने के लिए यह भी कहा कि वे सादगी से जीवन जीते हैं और निजी लाभ के लिए सरकारी तंत्र का उपयोग नहीं करते। उन्होंने अधिकारियों को संदेश दिया कि जब वे खुद बिना किसी लालच के काम कर सकते हैं, तो अधिकारी क्यों नहीं?

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