भोपाल। मध्यप्रदेश में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश के प्रमुख शहरों, विशेषकर राजधानी भोपाल में हवा की गुणवत्ता (Air Quality) लगातार खराब हो
भोपाल। मध्यप्रदेश में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश के प्रमुख शहरों, विशेषकर राजधानी भोपाल में हवा की गुणवत्ता (Air Quality) लगातार खराब हो रही है। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है।
वायु गणवत्ता खराब तो बिना देरी लागू करें प्रतिबंध
एनजीटी ने आदेश दिया है कि यदि प्रदेश में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुँचता है, तो ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तीसरे और चौथे चरण के प्रतिबंधों को बिना किसी देरी के तुरंत लागू किया जाए। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि हवा को 'जहरीली' होने से रोका जा सके और आम जनता के स्वास्थ्य की रक्षा की जा सके।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करे कड़ी कार्रवाई
एनजीटी ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे वायु गुणवत्ता की निरंतर निगरानी करें और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करें।
GRAP और विभिन्न चरण
वायु प्रदूषण की गंभीरता के आधार पर GRAP को अलग-अलग चरणों में बांटा गया है। तीसरा चरण (Stage III - Severe) में AQI 401 से 450 के बीच होता है। इसमें निर्माण कार्यों (Construction) और तोड़फोड़ पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया जाता है। गैर-जरूरी ईंट भट्टों और स्टोन क्रशरों को बंद कर दिया जाता है। इसके बाद चौथा चरण (Stage IV - Severe +) आता है। इसमें AQI 450 से ऊपर निकल जाता है। यह एक 'आपातकालीन' स्थिति होती है। इसमें ट्रकों के प्रवेश पर रोक, सार्वजनिक परिवहन में सख्ती और स्कूलों को बंद करने जैसे कड़े फैसले लिए जाते हैं। मध्य प्रदेश में बढ़ते वाहनों और औद्योगिक गतिविधियों के कारण कई शहरों का एक्यूआई (AQI) अक्सर 'खराब' श्रेणी में दर्ज किया जा रहा है, जिससे सांस संबंधी बीमारियां बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
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