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सरकारी बैंकों के विलय का कोई प्रस्ताव नहीं

सरकारी बैंकों के विलय का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं : वित्त राज्य मंत्री

नई दिल्ली। देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय या एकीकरण का फिलहाल प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक बयान में यह जानकारी दी।

सरकारी बैंकों के विलय का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं  वित्त राज्य मंत्री

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नई दिल्ली। देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय या एकीकरण का फिलहाल प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक बयान में यह जानकारी दी।

विलय से बैंक हुए मजबूत

वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को लोकसभा में लिखित जवाब में कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय या एकीकरण का कोई प्रस्ताव फिलहाल सरकार के समक्ष विचाराधीन नहीं है। उन्होंने कहा, पहले किए गए बैंकों के विलय से मजबूत और प्रतिस्पर्धी बैंक बने हैं, जिनकी कार्यक्षमता और पहुंच में सुधार हुआ है। विलय के बाद बैंकों को बड़े कर्ज देने की क्षमता बढ़ी, कम लागत वाले जमा तक बेहतर पहुंच मिली और उनका ग्राहक आधार व बाजार विस्तार हुआ।

डिजिटलीकरण से बढ़ी कार्यक्षमता

वित्त राज्य मंत्री ने कहा कि डिजिटलीकरण और बेहतर प्रबंधन से लागत में कमी आई है और कामकाज ज्यादा प्रभावी हुआ। इन सुधारों से बैंकों की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है।

परिचालन दक्षता और तालमेल में सुधार

उन्होंने कहा कि परिचालन के दायरे में वृद्धि और लागत दक्षता में सुधार के साथ-साथ सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने और डिजिटलीकरण के कारण भी तालमेल हासिल हुआ। राज्य मंत्री ने कहा कि परिकल्पना के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय से परिचालन को सुव्यवस्थित करने और लागत में कमी लाने के माध्यम से बैंकों की परिचालन दक्षता और वित्तीय सुदृढ़ता में सुधार हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप बैंकों के समेकित कारोबार में वृद्धि हुई है।

बैंक ऑफ बड़ौदा का कारोबार बढ़ा

भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बैंक ऑफ बड़ौदा का समेकित कुल कारोबार, जिसमें विजया बैंक और देना बैंक का 1 अप्रैल, 2019 से विलय हो गया था, मार्च 2019 में 16.1 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2025 में 27.0 लाख करोड़ रुपये हो गया।

पीएनबी का कारोबार भी बढ़ा

पंजाब नेशनल बैंक, जिसमें ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का 1 अप्रैल, 2020 से विलय हो गया था, मार्च 2020 में 18.3 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2025 में 26.8 लाख करोड़ रुपये हो गया।

यूनियन बैंक और केनरा बैंक में वृद्धि

उन्होंने बताया कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का कारोबार, जिसमें आंध्र बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक का 1 अप्रैल, 2020 से विलय हो गया था, मार्च 2020 में 15.3 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2025 में 22.9 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि केनरा बैंक, जिसमें सिंडिकेट बैंक का 1 अप्रैल, 2020 से विलय हो गया था, मार्च 2020 में 15.7 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2025 में 25.3 लाख करोड़ रुपये हो गया।

इंडियन बैंक का भी बढ़ा कारोबार

उन्होंने आगे कहा कि इंडियन बैंक का कुल कारोबार, जिसमें इलाहाबाद बैंक का 1 अप्रैल, 2020 से विलय हो गया था, मार्च 2020 में 8.6 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2025 में 13.3 लाख करोड़ रुपये हो गया।

EASE 9.0 सुधार एजेंडा लागू

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में, चौधरी ने कहा कि ईएएसई सुधार एजेंडा को प्रत्येक वित्तीय वर्ष की शुरुआत में भारतीय बैंक संघ के तत्वावधान में अंतिम रूप दिया जाता है और इसकी त्रैमासिक समीक्षा की जाती है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ईएएसई 9.0 सुधार एजेंडा फरवरी 2026 में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य 2047 तक विकसित भारत के लिए विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निर्माण करना है।

चार प्रमुख विषयों पर आधारित सुधार

उन्होंने कहा कि ईएएसई 9.0 सुधार एजेंडा जोखिम और लचीलापन, नवाचार, सामाजिक-आर्थिक प्रभाव और उत्कृष्टता जैसे चार विषयों पर आधारित है। इसमें ग्राहक सेवा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कार्यप्रणाली, आईटी आधुनिकीकरण, टिकाऊ वित्त और कर्मचारी कल्याण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

रुपये का मूल्य बाजार तय करता है

एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुए चौधरी ने कहा कि रुपये का मूल्य बाजार द्वारा निर्धारित होता है, जिसका कोई लक्ष्य या विशिष्ट स्तर तय नहीं होता है।

बैंक विलय की अटकलों पर विराम

वित्त राज्य मंत्री द्वारा लोकसभा में दी गयी जानकारी के बाद 2020 के बाद देश में एक और बड़े सरकारी बैंक विलय की अटकलों पर विराम लग गया है। लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय या एकीकरण का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। यह बयान उन खबरों को खारिज करता है जो बैंक एकीकरण के अगले दौर का सुझाव दे रही थीं।

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